
Lucknow, 5 जून . उत्तर प्रदेश की राजनीति में Governmentें बदलीं. चेहरे बदले और सत्ता के तमाम समीकरण भी. लेकिन योगी आदित्यनाथ ने अलग इतिहास गढ़ा है. वह राज्य के सबसे अधिक समय तक लगातार Chief Minister रहने वाले नेता बन चुके हैं. उनके 54वें जन्मदिन के मौके पर यह उपलब्धि एक बार फिर Political गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है.
गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर के रूप में धार्मिक पहचान रखने वाले योगी आदित्यनाथ ने राजनीति में भी अपनी अलग लकीर खींची. वर्ष 1998 में पहली बार Lok Sabha पहुंचने के साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में दस्तक दी. उस समय वह देश के सबसे युवा सांसदों में शुमार थे. इसके बाद उन्होंने लगातार पांच बार गोरखपुर का प्रतिनिधित्व किया और राजनीति के सबसे प्रभावी चेहरों में अपनी जगह बनाई.
मार्च 2017 में भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी. Chief Minister बनने के बाद योगी ने कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक सख्ती और बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स को अपनी Government की प्राथमिकता बनाया. एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट, डिफेंस कॉरिडोर, निवेश सम्मेलन और औद्योगिक परियोजनाओं ने उनके शासनकाल को अलग पहचान दी.
वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव योगी के Political करियर का अहम मोड़ साबित हुआ. तीन दशक बाद उत्तर प्रदेश में किसी दल ने लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत की Government बनाई और योगी दोबारा Chief Minister बने.
पिछले वर्ष उन्होंने स्वतंत्र India के पहले Chief Minister गोविंद बल्लभ पंत के सबसे लंबे कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए नया इतिहास रचा. इस उपलब्धि के साथ योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के Political इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार Chief Minister रहने वाले नेता बन गए.
समर्थक उन्हें सुशासन, निवेश और अपराध नियंत्रण का चेहरा बताते हैं, जबकि विपक्ष उनकी कार्यशैली और नीतियों पर सवाल उठाता रहा है. हालांकि Political मतभेदों से इतर यह तथ्य निर्विवाद है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में योगी आदित्यनाथ ने ऐसा रिकॉर्ड कायम किया है, जिसे हासिल करना आने वाले वर्षों में किसी भी नेता के लिए बड़ी चुनौती होगा. 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच योगी आदित्यनाथ भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जा रहे हैं.
गोरक्षपीठ से करीब ढाई दशकों से जुड़े गिरीश कुमार पांडेय का कहना है कि अगर एक लाइन में कहें तो योगी ने राजनीति की परिभाषा बदल दी. कोई भी क्षेत्र हो उन्होंने अपने पूर्ववर्तियों से लंबी लकीर खींची. दरअसल योगी को ‘नंबर वन’ से नीचे कुछ पसंद ही नहीं है. इसके लिए वह खुद को पूरी शिद्दत से झोंक देते हैं. यह काम वह जबसे सांसद हैं तबसे करते आ रहे हैं. सबसे कम उम्र के सांसद बनने का रिकॉर्ड उनके नाम है. उस दौरान देश की एक प्रतिष्ठित पत्रिका ने उनको देश के चंद रसूखदार लोगों में शामिल किया. मठ की परंपरा के मुताबिक मिथ तोड़ना उनकी आदत है. राजनीति में भी 1998 में प्रवेश के बाद वह अब तक अपने पूर्व नाम अजय के अनुरूप अजेय ही रहे हैं. यह बात उन्होंने खुद भी अपने किसी इंटरव्यू में कही थी.
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विकेटी/एसके
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