यादों में यश जौहर : ‘दोस्ताना’ के बाद कोई फिल्म नहीं हुई हिट, फिर बेटे ने बदली ‘धर्मा’ की किस्मत

New Delhi, 25 जून . हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्होंने सिर्फ फिल्में नहीं बनाईं, बल्कि एक ऐसी विरासत छोड़ी, जो पीढ़ियों तक याद रखी जाएगी. यश जौहर भी उन्हीं शख्सियतों में से एक थे. आज भले ही धर्मा प्रोडक्शंस का नाम आते ही लोगों के जेहन में करण जौहर की तस्वीर उभरती हो, लेकिन इस साम्राज्य की नींव रखने वाले उनके पिता यश जौहर थे.

यश जौहर का जन्म 6 सितंबर 1929 को अमृतसर में हुआ था. उनका बचपन लाहौर में बीता. विभाजन के बाद उनका परिवार दिल्ली आकर बस गया. परिवार का मिठाई का कारोबार था और यश जौहर अपने नौ भाई-बहनों में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे थे.

कहा जाता है कि उनकी दादी हमेशा उनसे कहती थीं कि वह कुछ बड़ा करने के लिए पैदा हुए हैं. यही बात उनके मन में घर कर गई. एक दिन उन्होंने कुछ बड़ा करने का फैसला किया और कुछ रुपयों के सहारे बंबई (अब Mumbai ) पहुंच गए. उन्हें नहीं पता था कि आगे क्या होगा, लेकिन इतना जरूर जानते थे कि उन्हें अपनी अलग पहचान बनानी है.

Mumbai पहुंचने के बाद यश जौहर ने नौकरी की तलाश शुरू की. उन्हें एक अंग्रेजी अखबार में फोटोग्राफर के तौर पर काम मिल गया. फिर धीरे-धीरे उनका फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ाव बढ़ा और उन्हें विभिन्न प्रोडक्शन हाउसों में काम करने का मौका मिला. उन्होंने सुनील दत्त के प्रोडक्शन हाउस में काम किया और बाद में देवानंद की ‘नवकेतन फिल्म्स’ से जुड़ गए. यहां उन्होंने कई सालों तक काम किया और ‘गाइड’, ‘ज्वेल थीफ’, ‘प्रेम पुजारी’ और ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ जैसी फिल्मों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

साल 1976 में यश जौहर ने बड़ा कदम उठाया और अपनी कंपनी ‘धर्मा प्रोडक्शंस’ की स्थापना की. कई सालों के अनुभव के बाद अब वह खुद फिल्में बनाना चाहते थे. धर्मा प्रोडक्शंस की पहली फिल्म ‘दोस्ताना’ थी, जो 1980 में रिलीज हुई. अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा और जीनत अमान अभिनीत यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई. ऐसा लगा कि यश जौहर की किस्मत चमक गई है.

इसके बाद कहानी बदल गई. ‘दुनिया’, ‘मुकद्दर का फैसला’, ‘अग्निपथ’, ‘गुमराह’ और ‘डुप्लीकेट’ जैसी कई फिल्में आईं, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकीं. लगातार असफलताओं ने धर्मा प्रोडक्शंस को आर्थिक संकट में डाल दिया.

हालात इतने खराब हो गए कि यश जौहर को अपनी कुछ संपत्तियां बेचनी पड़ीं. परिवार को भी मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा. हालांकि यश जौहर ने हार नहीं मानी. उन्होंने इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट और हैंडीक्राफ्ट के कारोबार में भी हाथ आजमाया.

जब यश जौहर संघर्ष कर रहे थे, तब उनका बेटा करण जौहर फिल्मी दुनिया को करीब से समझ रहा था. करण की फिल्मों में गहरी रुचि थी. उन्होंने आदित्य चोपड़ा के साथ ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ में सहायक निर्देशक के रूप में काम किया.

साल 1998 में करण जौहर ने बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ बनाई. शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी अभिनीत इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया. फिल्म ने न सिर्फ रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि धर्मा प्रोडक्शंस को भी नई जिंदगी दे दी.

इसके बाद 2001 में ‘कभी खुशी कभी गम’ आई और फिर 2003 में ‘कल हो न हो’. लगातार तीन बड़ी सफलताओं ने धर्मा प्रोडक्शंस को Bollywood के सबसे बड़े बैनरों में शामिल कर दिया. जिस सफलता का इंतजार यश जौहर वर्षों से कर रहे थे, वह आखिरकार उनके बेटे ने दिखाई.

जब धर्मा प्रोडक्शंस सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रहा था, तभी यश जौहर की जिंदगी में एक बड़ी चुनौती आ गई. उन्हें कैंसर हो गया था. इलाज चलता रहा, लेकिन बीमारी लगातार बढ़ती गई. 26 जून 2004 को यश जौहर ने दुनिया को अलविदा कह दिया.

पीआईएम/एबीएम