वर्ल्ड हैंड हाइजीन डे: सही तरीके से हाथ धोना जरूरी, ‘सुमंक’ विधि करेगा संक्रमण से बचाव

New Delhi, 5 मई . बढ़ता प्रदूषण, मौसम में बदलाव अपने साथ न जाने कितनी ही बीमारियों को लेकर आते हैं. हालांकि, कोविड-19 के बाद से पर्सनल हाइजीन को लेकर लोगों में जागरूकता भी बढ़ी है. फिर भी संक्रमण से फैलने वाली बीमारियां लगातार चुनौती बनी हुई हैं. हाथों की साफ-सफाई इन बीमारियों को रोकने में सबसे अहम भूमिका निभाती है. ‘वर्ल्ड हैंड हाइजीन डे’ के मौके पर नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) से ‘सुमंक’ विधि को समझें, जो हाथ धोने का आसान और प्रभावी तरीका है.

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि सही तरीके से हाथ धोने की आदत डालकर कई बीमारियों को पनपने से रोका जा सकता है. यह सस्ता, आसान और सबसे प्रभावी उपाय है, जो परिवार के स्वास्थ्य की सुरक्षा करता है.

‘वर्ल्ड हैंड हाइजीन डे’ पर विशेषज्ञों का संदेश है कि बार-बार हाथ धोने की आदत डालें. खाना बनाने, खाने, बाथरूम इस्तेमाल करने, बाहर से आने या बच्चे को छूने के बाद जरूर ‘सुमंक’ विधि अपनाएं. स्वस्थ रहने के लिए छोटी-छोटी आदतें बहुत महत्वपूर्ण हैं.

सुमंक का तरीका जानने से पहले ये जानें कि ‘सुमंक’ क्या है? यह अंग्रेजी शब्द एसयूएमएएनके के अक्षरों से बना है. यह हाथ धोने की 6-स्टेप प्रक्रिया को याद रखने का एक आसान तरीका है.

एस (सीधा): सबसे पहले दोनों हथेलियों को साबुन लगाकर सीधे रखते हुए अच्छी तरह रगड़ें.

यू (उल्टा): हाथों को उल्टा करके भी दोनों तरफ से रगड़ें.

एम (मुट्ठी): मुट्ठी बंद करके हाथों को साबुन से अच्छी तरह घिसें.

ए (अंगूठा): अंगूठों को मुट्ठी में लेकर दोनों तरफ से रगड़ें.

एन (नाखून): नाखूनों को साबुन से अच्छी तरह साफ करें, क्योंकि यहां सबसे ज्यादा गंदगी और बैक्टीरिया छिपे रहते हैं.

के (कलाई): अंत में दोनों कलाइयों को भी अच्छी तरह रगड़कर साफ करें.

यूनिसेफ के अनुसार, इन 6 स्टेप्स को पूरा करने में कम से कम 40 सेकंड तक साबुन से हाथ धोने चाहिए. उसके बाद साफ बहते पानी से हाथ धोकर साफ तौलिए या एयर ड्रायर से सुखा लें.

नेशनल हेल्थ मिशन के ‘स्वच्छ हाथ, सुरक्षित जीवन’ अभियान के तहत बताया गया है कि ‘सुमंक’ विधि बैक्टीरिया, वायरस और अन्य रोगजनकों को प्रभावी ढंग से हटाती है. इससे फ्लू, कोविड-19, डायरिया, पेट के संक्रमण जैसी बीमारियों से बचाव होता है. यह विधि खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों के लिए बहुत उपयोगी है. अस्पतालों में संक्रमण कम करने और रक्त प्रवाह सुधारने में भी यह मददगार साबित होती है.

एमटी/एबीएम