
New Delhi, 21 मई . अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठन ‘वर्ल्ड सेंट्रल किचन’ (डब्ल्यूसीके) फंडिंग संकट से जूझ रहा है. हालात अब काबू से बाहर होते जा रहे हैं, इतने कि इसने आने वाले महीनों में गाजा में अपने फूड ऑपरेशन घटाने का फैसला ले लिया है. संगठन ने स्पष्ट कहा कि गाजा के लोगों को भोजन उपलब्ध कराने की पूरी जिम्मेदारी किसी एक संस्था पर नहीं डाली जा सकती.
डब्ल्यूसीके की आधिकारिक साइट ने इसकी तस्दीक की है. एक लंबे चौड़े लेख में उसने अपनी और गाजा की मजबूरियां गिनाई हैं. कहा है कि वह गाजा में भोजन वितरण को “प्री-सीजफायर फीडिंग लेवल” तक सीमित करेगा. यह फैसला केवल आर्थिक दबाव के कारण लिया गया है, जरूरत कम होने की वजह से नहीं.
संगठन के मुताबिक, 2023 में इजरायल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से उसने गाजा के लोगों को भोजन उपलब्ध कराने पर 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा खर्च कर दिया है. इजरायली नाकेबंदी के बाद गाजा में खाद्य आपूर्ति व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है. उस दौरान संगठन ने अपना ऑपरेशन बढ़ाकर रोजाना 10 लाख गर्म भोजन उपलब्ध कराया था.
वर्ल्ड सेंट्रल किचन ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर राहत कार्य लंबे समय तक चलाना किसी एक स्वयंसेवी संगठन के बूते की बात नहीं है. संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गाजा में मानवीय सहायता बढ़ाने का भी आह्वान किया.
संगठन का तर्क है कि ईरान और पूरे क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण गाजा तक पहुंचने वाले सीमा मार्गों पर असर पड़ा है. इसके बावजूद डब्ल्यूसीके को फिलहाल इतने ट्रक मिल रहे हैं कि वह अपनी राहत सेवाएं जारी रख सके.
डब्ल्यूसीके के संस्थापक जोस आंद्रेस ने कहा, “हमें हर दिन और ज्यादा ट्रकों और भोजन की जरूरत है ताकि हम भूखे परिवारों तक खाना पहुंचाते रहें. भोजन और ईंधन की लगातार आपूर्ति जरूरी है. यही गाजा की जीवनरेखा है और इसे हर हाल में खुला रहना चाहिए.”
डब्ल्यूसीके का कहना है कि गाजा में बिना रुकावट मानवीय सहायता पहुंचना बेहद जरूरी है. नियमित और भरोसेमंद पहुंच ही लोगों की जान बचा सकती है.
हालांकि संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल पहुंच पर्याप्त नहीं है. डब्ल्यूसीके आपातकालीन खाद्य राहत देने में विशेषज्ञ है, लेकिन लंबे समय तक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना अकेले किसी एक संस्था के बस की बात नहीं है.
संगठन के मुताबिक, गाजा में लोगों ने अपने घर और आजीविका दोनों खो दिए हैं. ऐसे में Governmentों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और साझेदार देशों को आगे आकर स्थायी और सुरक्षित आर्थिक मदद देनी होगी. डब्ल्यूसीके ने कहा कि दुनिया को केवल फिलिस्तीनियों की स्थिति पर बात नहीं करनी चाहिए, बल्कि ठोस सहायता भी देनी चाहिए.
गाजा में मानवीय संकट कुछ हद तक कम हुआ है, लेकिन फिलिस्तीनियों को अब भी भोजन और मेडिकल सप्लाई जैसी जरूरी चीजों की कमी का सामना करना पड़ रहा है.
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केआर/
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