लुपिन फाण्डेशन के द्वारा पारम्परिक गुणीजनों केे प्रमाणिकरण पर कार्यशाला का आयोजन · Indias News

लुपिन फाण्डेशन के द्वारा पारम्परिक गुणीजनों केे प्रमाणिकरण पर कार्यशाला का आयोजन


उदयपुर (Udaipur). शुक्रवार (Friday) को लुपिन हुमन वेलफेयर एवं रिसर्च फाण्उडेशन के द्वारा विद्या भवन कृशि विज्ञान केन्द्र, बड़गांव के सभागार में पारंपरिक सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा प्रदात्ताओं के प्रमाणिकरण पर एक लघु कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें उदयपुर (Udaipur) व डूंगरपुर (Dungarpur) के 15 प्रमाणित गुणीजनों को गुणवत्ता परिशद, भारत सरकार (Government) द्वारा संचालित स्वैच्छिक प्रमाणन योजना के तहत् प्रमाण पत्र प्रदान किये गये. अब ये गुणीजन अपने ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में एक प्रमाणित स्वास्थ्य सेवा प्रदात्ता के रूप में प्राकृतिक जड़ी-बुटियों का संरक्षण एवं संवर्धन करते हुए आमजन को विभिन्न बीमारियों जैसे की सर्पदंश, गठिया, पिलिया, अस्थियोजन, दाई एवं सामान्य बीमारियों का इलाज मुहैया करा सकते है.

इस कार्यशाला में मुख्य अतिथि महोदय डॉ. अनुराग प्रियदर्शी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, विद्या भवन सोसायटी एवं अध्यक्षता राजकुमार सिंह, मुख्य वन संरक्षक, राजस्थान (Rajasthan) सरकार (Government) ने की. कार्यक्रम के प्रारंभ में लुपिन फाण्डेशन के क्षेत्रिय प्रबंधक डॉ.राजेश शर्मा ने लुपिन द्वारा किये जाने वाले कार्यो एवं इस प्रमाणन योजना के बारे में विस्तृत से प्रस्तुतीकरण दिया एवं किस तरह से इन गुणीजनो को इस योजना से जोडकर स्वाबलम्बन की ओर अग्रसर करते हुए एक प्रमाणित वेध का दर्जा दिया गया है.

वर्तमान में इस योजना के माध्यम से गुणवत्ता परिशद, भारत सरकार (Government) ने भारत के 7-8 राज्यों के 170 परंपरागत गुणीजनों का इटिका क्लीनफर्म प्राइवेट लिमिटेड (प्रमाणन संस्था) के द्वारा प्रमाणिकरण हो चुका है. राजस्थान (Rajasthan) के उदयपुर (Udaipur) व डूंगरपुर (Dungarpur) जिले में पहली बार इस योजना के तहत् 15 गुणीजनों को प्रमाणित किया गया है. मुख्य अतिथि डॉ. प्रियदर्शी ने अपने उद्बोधन में पांरपरिक गुणीजनों को इस कार्य को आजीविका के अवसर के रूप में देखते हुए इन जड़ी-बुटियों के संरक्षण व संवर्धन पर जोर दिया है एवं इस कार्य के लिए लुपिन फाउण्डेशन को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है जिससे कि गुणीजनों को इस कार्य में दीर्घकालीन अवधि के लिए जोडकर आमजन को इसके जुडी-बुटियों के औशधी लाभ से सेवा की जा सके.

अध्यक्षता करते हुए मुख्य वन सरंक्षक ने यह विचार व्यक्त किया कि गुणीजनों को जड़ी-बुटियों का संवर्धन कर वन विभाग की नर्सरीयों में प्लांटिग मेटेरियल उपलब्ध कराये जिससे कि अधिकाधिक संख्या में उनका विस्तार कर इन विलुप्त हो रही प्रजातियों का समुचित प्रबंधन किया जा सके. कार्यशाला में सुखाडिया विश्वविद्यालय के सेवानिवृत इमेरेटस प्रोफेसर डॉ. एस.एस.कटेवा, सेवामंदिर के डॉ. जी.पी.एस. झाला ने तकनीकी विशय पर विस्तारपूर्वक प्रस्तुतीकरण दिया. कार्यक्रम के सेवामंदिर के सीइओ रौनक शाह, विद्या भवन महाविद्यालय की डॉ. अनिता जैन, कृशि विज्ञान केन्द्र के प्रभारी डॉ. दीपक जैन ने अपनी प्रभावी उपस्थिति कार्यशाला में दी. कार्यक्रम का संचालन व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजेश शर्मा ने दिया.

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