पूजा-स्थलों पर शालीन कपड़े पहनें महिलाएं, मर्यादा बनाए रखें: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी

बरेली, 11 अगस्त . वृंदावन के इस्कॉन मंदिर द्वारा भक्तों के लिए ड्रेस कोड लागू करने के फैसले का समर्थन करते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने महिलाओं से अपील की कि वे धर्म की परवाह किए बिना सभी पूजा-स्थलों पर शालीन कपड़े पहनें.

से बातचीत के दौरान मुस्लिम धर्मगुरु ने कहा, “सिर्फ इस्कॉन मंदिरों में ही नहीं, बल्कि India की सभी धार्मिक जगहों पर, चाहे वे गुरुद्वारे हों, चर्च हों या दरगाहें, महिलाओं को पूरे शरीर को ढकने वाले और शालीन कपड़े पहनने चाहिए. यही India की संस्कृति और हमारी परंपरा है.”

उन्होंने आगे कहा, “शरीर दिखाने वाले कपड़े पहनना असल में यूरोपीय संस्कृति है; यह ईसाइयों की संस्कृति और परंपरा है. यूरोपीय ईसाई संस्कृति को अपनाने का मतलब है कि हम India की संस्कृति और परंपराओं को भूल रहे हैं. खासकर महिलाओं को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए. जब ​​भी महिलाएं किसी धार्मिक स्थल पर जाएं, चाहे वे दरगाह जाएं या दर्शन के लिए मंदिर, तो उन्हें उस जगह की पवित्रता और गरिमा का पूरा सम्मान करना चाहिए.”

भगवान कृष्ण से जुड़े सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक, वृंदावन के इस्कॉन मंदिर के मैनेजमेंट ने मंदिर आने वाले भक्तों के लिए शालीन कपड़े पहनना जरूरी कर दिया है. छोटे या अशोभनीय कपड़े पहनने पर सख्त रोक लगा दी गई है. नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए, मंदिर प्रशासन ने प्रवेश द्वारों पर नोटिस बोर्ड लगाए हैं, जिनमें विजिटर्स के लिए ड्रेस कोड और फोटोग्राफी समेत अन्य गाइडलाइंस बताई गई हैं.

इससे पहले दिन में रामदल ट्रस्ट के प्रेसिडेंट कल्कि राम ने कहा कि मंदिरों में ड्रेस कोड लागू किया जाना चाहिए, क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग पूजा-स्थलों पर ऐसे कपड़े पहनकर आते हैं जो शालीनता के मानकों के अनुरूप नहीं होते.

उन्होंने ​​कहा कि ड्रेस कोड लागू किया जाना चाहिए क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि लोग मंदिरों में ऐसे कपड़े पहनकर आते हैं जो शालीनता के खिलाफ होते हैं. हालांकि, इसके साथ ही इस्कॉन मंदिर को अपनी कार्यप्रणाली में भी बड़े सुधार करने की ज़रूरत है. एक तरफ तो वे भक्तों को श्रीमद्भगवद्गीता देते हैं और दूसरी तरफ उनके हाथों में मंजीरा थमा देते हैं.

संत सत्येंद्र दास वेदांती ने भी इस कदम का स्वागत किया और सुझाव दिया कि पूरे देश में इसी तरह के नियम अपनाए जाने चाहिए.