बिजली के नुकसान को कम करने की दृष्टि से बिजली मंत्रालय ने डिसकॉम्स के ऊर्जा लेखांकन को अनिवार्य किया

नई दिल्ली (New Delhi) . विद्युत क्षेत्र में चल रहे सुधारों के तहत एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, विद्युत मंत्रालय ने आज बिजली वितरण कंपनियों के लिए समय-समय पर अपने यहाँ ऊर्जा लेखांकन (एनर्जी एकाउन्टिंग) करवाना अनिवार्य कर दिया है. इस संबंध में ऊर्जा संरक्षण (ईसी) अधिनियम, 2001 के प्रावधानों के तहत आवश्यक आदेश ऊर्जा मंत्रालय के अनुमोदन के बाद ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) द्वारा जारी किया था. जारी की गई अधिसूचना किसी भी प्रमाणित ऊर्जा प्रबंधक के माध्यम से 60 दिनों के भीतर वितरण कम्पनियों (डिसकॉम्स) द्वारा अपने तिमाही ऊर्जा लेखांकन करवाने का निर्धारण करती है. साथ ही एक स्वतंत्र मान्यता प्राप्त ऊर्जा लेखा परीक्षक द्वारा वार्षिक ऊर्जा लेखा परीक्षा भी करवानी होगी. इन दोनों रिपोर्टों को सार्वजनिक डोमेन में प्रकाशित किया जाएगा. ऊर्जा लेखांकन रिपोर्ट उपभोक्ताओं की विभिन्न श्रेणियों द्वारा बिजली की खपत और विभिन्न क्षेत्रों में संचरण (ट्रांसमिशन) और वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) हानियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करेगी. इससे उच्च नुकसान और चोरी के क्षेत्रों की पहचान हो सकेगी तथा और सुधारात्मक कार्रवाई को सक्षम किया जा सकेगा. यह उपाय नुकसान और चोरी के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने में भी सक्षम होगा. प्राप्त आंकड़े (डेटा) वितरण कम्पनियां (डीआईएससीओएमएस–डिस्कॉम्स) अपने बिजली के नुकसान (हानि) को कम करने के लिए उचित उपाय करने में में भी सक्षम हो सकेंगे. वितरण कम्पनियां उपयुक्त बुनियादी ढांचे का उन्नयन करने के अतिरिक्त मांग पक्ष के प्रबंधन (डीएसएम) प्रयासों की प्रभावी तरीके से योजना बना सकेंगे. इस पहल से हमारे पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने में भारत की जलवायु कार्रवाइयों में और अधिक योगदान दिया जा सकेगा.

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