
New Delhi, 21 मई . पश्चिम बंगाल में मदरसों में वंदे मातरम को अनिवार्य करने को लेकर सियासत गरमा गई है. इसी मुद्दे पर जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने खुलकर अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि देश से मोहब्बत करना और किसी खास गीत को जबरदस्ती गाने के लिए दबाव देना, दोनों अलग-अलग बातें हैं. उनका कहना है कि अगर कोई अपनी खुशी से ‘वंदे मातरम’ गाना चाहता है तो जरूर गाए, लेकिन Government किसी नागरिक पर इसे थोप नहीं सकती.
मलिक मोतसिम खान ने Thursday को से बातचीत करते हुए कहा कि India का संविधान हर नागरिक को अपनी पसंद और विचार रखने का अधिकार देता है. देश की इज्जत करना हर इंसान का फर्ज है, लेकिन कौन सा गीत गाना है और कौन सा नहीं, यह उनकी निजी पसंद हो सकती है. अदालत ने भी कई बार साफ किया है कि किसी को राष्ट्रगान या किसी गीत के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. अगर मदरसों को कोई सलाह दी गई है तो वह सिर्फ एडवाइजरी हो सकती है, कोई जबरदस्ती वाला आदेश नहीं.
उन्होंने कहा, “जिसको गाना है वह शौक से गाए, जिसको नहीं गाना है वह ना गाए.” उनके मुताबिक, लोकतंत्र में लोगों को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं के हिसाब से फैसले लेने की आजादी होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अगर Government जबरदस्ती करती है तो यह Supreme Court की भावना और संविधान के खिलाफ माना जाएगा.
वहीं, हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल में बकरीद से पहले Government की ओर से कुर्बानी को लेकर सख्त नियमों की चर्चा हो रही है. इस पर मलिक मोतसिम खान ने कहा कि इस्लाम में सिर्फ गाय ही नहीं बल्कि कई दूसरे जानवर भी हलाल माने गए हैं. उन्होंने कहा, “भैंस है, बकरा है, भेड़ है, बहुत से ऐसे जानवर हैं जिनकी कुर्बानी दी जा सकती है.”
उन्होंने कहा कि अगर Government गाय की कुर्बानी पर रोक लगाती है तो मुसलमानों के सामने दूसरे विकल्प मौजूद हैं. उनके मुताबिक, मुसलमानों को सिर्फ गाय की कुर्बानी पर अड़ने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, “हमारे सामने बहुत सारे हलाल जानवर हैं, उनकी कुर्बानी भी दी जा सकती है.” उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि गाय की कुर्बानी को लेकर जिद नहीं करनी चाहिए और शांति व समझदारी से काम लेना चाहिए.
उन्होंने Government की नीतियों पर सवाल भी उठाए. उनका कहना था कि देश में बड़े-बड़े स्लॉटर हाउस चल रहे हैं, जहां से बीफ विदेशों में भेजा जाता है. उन्होंने दावा किया कि इनमें से कई कारोबार गैर-मुस्लिमों के हाथ में हैं. ऐसे में सिर्फ मुसलमानों को निशाना बनाना सही नहीं है. अगर Government सच में गाय संरक्षण चाहती है तो सबसे पहले उन बड़े बूचड़खानों पर कार्रवाई करनी चाहिए, जहां बड़े पैमाने पर कारोबार हो रहा है.
उन्होंने यह भी कहा कि पशुपालन और मवेशियों का कारोबार ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है. अगर Government अचानक सख्ती करती है तो इससे गांवों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है. उनके मुताबिक यह सिर्फ धार्मिक मुद्दा नहीं बल्कि आर्थिक मुद्दा भी है.
उत्तर प्रदेश के बिजनौर के एक नाबालिग लड़के के कश्मीर जाकर इस्लाम धर्म अपनाने को लेकर चल रहे विवाद पर मलिक मोतसिम ने कहा कि India का संविधान हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने और बदलने की आजादी देता है. अगर कोई अपनी मर्जी से कोई मजहब कबूल करता है तो यह उसका मौलिक अधिकार है. हर इंसान को अपनी पसंद का रास्ता चुनने की आजादी होनी चाहिए. अगर कोई किसी धर्म को सही समझता है और उसे अपनाना चाहता है तो दूसरों को इससे परेशानी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा, “जिसे जो सही लगे, वह उसे अपनाए. यह उसका व्यक्तिगत फैसला है.”
मलिक मोहतसिम खान ने कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि हर नागरिक को सोचने, बोलने और अपने हिसाब से जीवन जीने की आजादी मिले. उनके मुताबिक Government का काम लोगों पर अपनी पसंद थोपना नहीं बल्कि सभी के अधिकारों की रक्षा करना है.
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पीआईएम/एबीएम
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