किस-किस ने छोड़ी टीएमसी, अभी औपचारिक ऐलान नहीं: कीर्ति आजाद

New Delhi, 11 जून . तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद कीर्ति आजाद ने पार्टी में चल रही अटकलों और बागी रुख को लेकर सख्त बयान दिया है. उन्होंने कहा कि पार्टी किसने छोड़ी है? क्या कोई लिस्ट है? क्या किसी ने औपचारिक रूप से कुछ सौंपा है? वे 8 तारीख को स्पीकर से मिले थे, लेकिन अब तक कुछ भी नहीं सौंपा गया.

टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा, “असल में, तीन सांसदों ने मुझे बताया है कि उन्होंने कुछ कागजात पर दस्तखत किए थे लेकिन अब वे अपना नाम वापस लेना चाहते हैं और कथित तौर पर उन्हें ऐसा करने नहीं दिया जा रहा है.”

उन्होंने अपनी सुरक्षा व्यवस्था कम किए जाने पर कहा कि मेरी सुरक्षा व्यवस्था कम कर दी गई है. पहले मेरे घर पर एक होम गार्ड तैनात था, जिसे हटा लिया गया. फिर मेरे पीएसओ को भी हटा दिया गया. अगर भाजपा समर्थक आकर मेरे घर पर पत्थर फेंकते हैं तो फेंकने दें. मैं डरता नहीं हूं.

पश्चिम बंगाल की स्थिति पर चिंता जताते हुए कीर्ति आजाद ने कहा, “पश्चिम बंगाल में हालात गंभीर हैं. लगभग 25 लोगों की मौत हो चुकी है और खबर है कि सात लोगों की मौत कस्टडी में हुई है, जबकि कोई First Information Report दर्ज नहीं की गई. हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया है.”

टीएमसी छोड़ने वाले नेताओं की लगातार बदलती लिस्टों पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “हर दिन एक नई लिस्ट सामने आती है. एक दिन 19 नाम होते हैं, अगले दिन तीन नाम बदल दिए जाते हैं और फिर अलग नामों वाली एक और लिस्ट आ जाती है. ये लिस्ट बदलती रहती हैं और इनकी कोई विश्वसनीयता नहीं है. अगर कोई जाना चाहता है, तो वह जा सकता है. लेकिन पार्टी छोड़ने के बाद उन्हें तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने का दावा नहीं करना चाहिए. अगर उनका इरादा भाजपा में शामिल होने या उसमें विलय करने का है, तो उन्हें खुलकर ऐसा करना चाहिए.”

कल्याण बनर्जी के बयान पर कीर्ति आजाद ने कहा, “कल्याण बनर्जी बहुत अच्छे और भावुक इंसान हैं. पार्टी के मुश्किल दिनों से ही वे दीदी के साथ खड़े रहे हैं. उन्होंने कठिन समय देखा है और कभी पीछे नहीं हटे. जो व्यक्ति भावुक, ईमानदार और संघर्ष करने वाला होता है, वह कभी-कभी गुस्से या भावना में आकर कुछ कह सकता है. उन्होंने खुद कहा है कि दीदी जो भी फैसला करेंगी, वह उन्हें मंजूर होगा. वे दीदी का बहुत सम्मान और आदर करते हैं. अगर किसी के साथ कोई समस्या है, तो उस पर बातचीत करके समाधान निकाला जा सकता है.”

उन्होंने आगे कहा, “अगर किसी को पार्टी से कोई मतभेद है, तो उन्हें साफ-साफ बताना चाहिए. क्या ये मतभेद सिर्फ चुनाव के बाद ही सामने आ रहे हैं? जो लोग अब पार्टी छोड़ रहे हैं, उन पर पहले भी भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं.”

डीकेपी