
Patna, 2 जुलाई . पीएम मोदी के अगुवाई वाली मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर चर्चा तेज हो गई है. इस बीच बिहार के पूर्व Chief Minister नीतीश कुमार को मोदी कैबिनेट में कोई बड़ा पद दिए जाने की बात कही जा रही है. वहीं, जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कुछ विधायकों द्वारा उन्हें उप Prime Minister बनाए जाने की मांग भी की जा रही है. अब इस पर जेडीयू विधायक श्याम रजक का स्पष्टीकरण सामने आया है. उन्होंने कहा कि कैबिनेट विस्तार या किसी भी तरह के पदों का फैसला पूरी तरह Prime Minister के अधिकार क्षेत्र में आता है. उनके अनुसार यह निर्णय केवल Prime Minister की इच्छा और राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर ही लिया जाता है और इसमें किसी भी तरह की बाहरी दखलअंदाजी उचित नहीं मानी जानी चाहिए.
श्याम रजक ने से बातचीत के दौरान कहा कि अगर Prime Minister को लगता है कि किसी नेता को कैबिनेट में शामिल करना है या किसी को उप Prime Minister जैसा पद देना है, तो यह उनका संवैधानिक अधिकार है. यदि Prime Minister किसी वरिष्ठ नेता की सलाह मानते हैं, तो यह उनकी Political महानता को दर्शाता है.
नीतीश कुमार को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का कद राजनीति में बहुत बड़ा है और उन्हें देश की जनता एक अनुभवी और विकासशील नेता के रूप में देखती है. नीतीश कुमार के पास प्रशासनिक अनुभव और निर्णय लेने की क्षमता है. वह Prime Minister की रेस के नेता रहे है. श्याम रजक ने यह भी कहा कि अगर भविष्य में नीतीश कुमार को कोई बड़ा पद मिलता है, तो वह राष्ट्रहित में ही होगा और इसे Political दृष्टि से नहीं बल्कि विकास की दृष्टि से देखना चाहिए.
इसी बातचीत के दौरान श्याम रजक ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव पर भी टिप्पणी की. उन्होंने तेजस्वी यादव के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने कहा था, “मैं सर्वेंट क्वार्टर में पैदा हुआ और मैं दो कमरे में भी रह सकता हूं.” इस पर श्याम रजक ने कहा कि अगर ऐसा ही है तो क्यों हाय तौबा मचा रहे हैं. दो कमरे में रहने की स्थिति में वे नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि तेजस्वी तो सुख-सुविधाओं में अपना जीवन जीते रहे हैं. उनके फ्लैट और मकान में सजावट का सामान भरा रहता है. उन्होंने लाखों-करोड़ों रुपये से सजावट का काम करवाया है. अगर वे गरीब होते तो गरीबों जैसा जीवन जीते. यह सब केवल दिखावटी बातें हैं. अगर ऐसा नहीं है तो फिर वे अपने बंगले के लिए क्यों झगड़ा करते? क्यों कहते कि मेरे बंगले में लिफ्ट लगाई जाए? यह बताता है कि उनकी आंतरिक इच्छा कुछ और है और दिखाने के लिए कुछ और.
तेजस्वी यादव को उनकी पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें सलाह दी थी कि उन्हें सड़क पर उतरकर जनता के बीच जाना चाहिए और अपने Political अनुभव को मजबूत करना चाहिए. इस पर श्याम रजक ने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल के गठन के समय जो उद्देश्य थे, वह बिहार के दबे-कुचले और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए थे, लेकिन बाद में पार्टी परिवार के चंगुल में फंस गई और अपने मूल उद्देश्य से भटक गई. अब निर्णय परिवार के हाथ में है और उन्होंने अपने पुत्र को अधिकार दे दिया है. उनकी स्थिति सबके सामने है. देश में भी उन्हें लोगों ने स्वीकार नहीं किया. राजद को ऐसी हार मिली कि वह अब कहीं के नहीं रहे. अब वे आगे क्या करेंगे, यह कहना मुश्किल है. वरिष्ठ नेता उन्हें सलाह दे रहे हैं, लेकिन उनकी सोच और दृष्टि जनता या कार्यकर्ताओं के हित में नहीं है, बल्कि अपने परिवार और सुख-सुविधा पर केंद्रित है.
केंद्र Government संसद के आने वाले मानसून सत्र में विवादित संविधान (130वां संशोधन) बिल, 2025 पेश कर सकती है. इस बिल इस बिल में गंभीर आपराधिक आरोपों के तहत 30 दिनों तक हिरासत में रहने पर Prime Minister, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को अपने आप ही पद से हटाए जाने का प्रावधान है. इस पर श्याम रजक ने कहा, “संविधान को बदला नहीं जा सकता, लेकिन उसमें संशोधन जरूर किया जा सकता है. इसमें कई बार संशोधन किए गए हैं. अगर Prime Minister कोई संशोधन लाना चाहते हैं, तो उसे संसद में पेश किया जाएगा. संसद में फैसले आम सहमति और बहुमत से लिए जाते हैं, और अगर उस आधार पर कोई संशोधन पास होता है, तो वह पूरी तरह से संवैधानिक होता है. यदि भ्रष्टाचार और अपराध पर अंकुश लगाने के लिए कोई संशोधन लाया जाता है, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए.”
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पीआईएम/पीएम
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