उत्तराखंड में 2022 तक, हर घर को मिलेगा नल से जल: मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल

नई दिल्ली (New Delhi) . वीरवार रात को अपने तीन दिवसीय उत्तराखंड प्रवास पर पहुंचे केंद्रीय जलशक्ति एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री, प्रहलाद सिंह पटेल ने कई योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया. और प्रदेश में चल रही योजनाओं की स्थिति जानी. उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री (Chief Minister) से मुलाकात की और प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत अभियान, नमामि गंगे पर चर्चा की. उत्तराखंड के श्यामपुर में केंद्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने विधिवत पूजा अर्चना के साथ 9.4 करोड रुपये की लागत से पेयजल योजना का शिलान्यास किया. इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि उत्तराखंड के 47.30 प्रतिशत घरों में जल जीवन मिशन के तहत लगे पानी के कनेक्शन दिए गए हैं. 2022 तक लक्ष्य पूरा करने की चुनौती है. उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन की योजनाओं पर आचार संहिता का प्रभाव नहीं पड़ेगा. इसके लिए चुनाव आयोग से मांग की जाएगी. विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल एवं पेयजल मंत्री बिशन सिंह चुफाल भी कार्यक्रम में शामिल हुए. केंद्रीय राज्यमंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने ऋषिकेश के चंद्रेश्वरनगर स्थित 7.50 एमएलडी एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने प्लांट परिसर में पौधारोपण किया. इसके बाद उन्होंने प्रेसवार्ता में कहा कि 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कहा कि महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर देश को क्या देंगे. इससे पहले 2019 में देश खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) हो गया. स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और धार्मिक स्थलों के आसपास जहां पर पानी होगा वहीं पर शौचालय बनाए जा रहे हैं. ग्राम पंचायत ठोस कूड़े का प्रबंधन कर रही हैं. दूसरे चरण में ग्राम पंचायत कीचन गार्डन बना रहे हैं, जिसमें घर से निकलने अपशिष्ट की खाद बनाई जा रही है. तीसरे चरण में कूड़ा प्रबंधन को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की सोच मूर्त रूप लेती दिख रही है. जरूरतमंद लोगों को एक कमरे की छत, बिजली का कनेक्शन, गैस कनेक्शन और आयुष्मान कार्ड दिया गया है. घर-घर पानी पहुंचाया जा रहा है. नमामि गंगे परियोजना इस दिशा में काफी हद तक सफल रही है. उन्होंने कहा कि ऋषिकेश व हरिद्वार (Haridwar) शहर में दूषित नालों को रोकने और सीवर शोधन के लिए पर्याप्त क्षमता के एसटीपी बनाए गए हैं. ऋषिकेश में लक्कड़घाट का एसटीपी 26 एमएलडी का बनाया गया है.

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