भीषण गर्मी के बीच मध्य प्रदेश में गहराया जल संकट, कांग्रेस-भाजपा में छिड़ी सियासी जंग

Bhopal , 30 मई . Madhya Pradesh के कई हिस्से इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं. राज्य के अनेक जिलों में तापमान 42 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है. लगातार बढ़ती गर्मी के कारण पेयजल संकट गहरा गया है, जो अब प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच बड़ा Political मुद्दा बन गया है.

अत्यधिक गर्मी के चलते भूजल स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है. राज्य के कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में जलापूर्ति भी प्रभावित हुई है. इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा Government और भाजपा शासित नगर निकायों पर हमला तेज कर दिया है.

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने Saturday को आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन और अन्य पेयजल योजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन आम लोगों को आज भी पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.

उन्होंने कहा, “Madhya Pradesh के लोग आज पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए तरस रहे हैं. आदिवासी महिलाओं को कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाना पड़ रहा है. बच्चे दूषित पानी पीने को मजबूर हैं और गांवों में संकट लगातार बढ़ रहा है, लेकिन भाजपा Government इस ओर गंभीर नहीं दिख रही है.”

उमंग सिंघार ने दावा किया कि 2024-26 के दौरान जल जीवन मिशन के तहत करीब 25,000 करोड़ रुपये और ग्रामीण नल-जल योजना के तहत 490 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इन योजनाओं का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पाया.

प्रदेश के कई जिलों में जल संकट की तस्वीरें सामने आ रही हैं. उमरिया जिले में social media पर वायरल वीडियो में बच्चे पानी भरने के लिए रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलते दिखाई दे रहे हैं. भीषण गर्मी के कारण कुएं और हैंडपंप सूख चुके हैं.

गुना जिले के टांडा गांव में ग्रामीणों को पीने और घरेलू उपयोग के लिए गड्ढे खोदकर कीचड़युक्त पानी इकट्ठा करते देखा गया. ग्रामीणों का कहना है कि पर्याप्त जलापूर्ति नहीं होने के कारण इंसानों और पशुओं को एक ही जल स्रोत पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

राजधानी Bhopal , जिसे ‘झीलों का शहर’ कहा जाता है, वहां भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं. कई इलाकों में बोरवेल सूखने लगे हैं. लोगों का आरोप है कि नर्मदा जलापूर्ति में भारी कमी आई है और कुछ क्षेत्रों में प्रतिदिन केवल 12 से 15 मिनट तक ही पानी उपलब्ध कराया जा रहा है.

जल संकट बढ़ने के साथ निजी पानी के टैंकरों पर निर्भरता भी बढ़ गई है. स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले 5,000 लीटर पानी का टैंकर लगभग 350 रुपये में मिल जाता था, जिसकी कीमत अब बढ़कर 450 से 500 रुपये तक पहुंच गई है.

इस सप्ताह की शुरुआत में Madhya Pradesh कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में जल संकट और पेयजल की गुणवत्ता को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था. उन्होंने दावा किया कि इंदौर के 29 वार्डों से लिए गए 240 पानी के नमूनों में से लगभग 98 प्रतिशत में हानिकारक बैक्टीरिया पाए गए.

हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर सस्ती राजनीति करने का आरोप लगाया है. इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नगर निगम प्रशासन का बचाव करते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं.

इस बीच राज्य Government पाइपलाइन विस्तार, जल संरक्षण और जल स्रोतों के सुदृढ़ीकरण से जुड़ी परियोजनाओं को प्रमुखता से गिना रही है. लेकिन भीषण गर्मी और बढ़ती जन परेशानी के बीच जल संकट अगले वर्ष होने वाले नगरीय निकाय चुनावों से पहले प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है.

डीएससी