‘वंदे मातरम’ बोलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, सरकार की कथनी-करनी में अंतर : वारिस पठान

Mumbai , 29 जुलाई . ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रवक्ता वारिस पठान ने ‘वंदे मातरम’ और एंटी-पेपर लीक विधेयक को लेकर केंद्र Government पर जुबानी हमला किया. उन्होंने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रदर्शनकारी छात्रों पर BJP MP कंगना रनौत की टिप्पणियों पर भी केंद्र Government को घेरा.

उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को ‘वंदे मातरम’ बोलने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और Government को छात्रों के साथ किए गए वादों को निभाना चाहिए.

वारिस पठान ने कहा कि विधेयक पर चर्चा के बाद पार्टी अपना अंतिम रुख स्पष्ट करेगी. हम ‘वंदे मातरम’ का आदर और सम्मान करते हैं, लेकिन किसी को इसे बोलने के लिए जबरन मजबूर नहीं किया जा सकता. इसे अनिवार्य बनाना संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है. संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है. राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है और एआईएमआईएम भी उसका पूरा सम्मान करती है.

उन्होंने कहा कि जब जन-गण-मन गाया जाता है तो हम पूरे सम्मान के साथ उसमें शामिल होते हैं. हमें भारतीय मुसलमान होने पर गर्व है और तिरंगा हमारी आन, बान और शान है. लेकिन, ‘वंदे मातरम’ की कुछ पंक्तियां ऐसी हैं जिन्हें एक मुसलमान अपनी धार्मिक मान्यताओं के कारण नहीं बोल सकता. इसलिए इसे अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए. यदि किसी कानून के माध्यम से लोगों पर इसे थोपने की कोशिश की जाती है तो इससे समाज में अनावश्यक तनाव और नफरत का माहौल पैदा होगा.

एंटी-पेपर लीक विधेयक पर वारिस पठान ने कहा कि केवल सजा बढ़ा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले से कानून होने के बावजूद पेपर लीक की घटनाएं लगातार होती रही हैं. उन्होंने कहा कि क्या नया कानून उन छात्रों की जान वापस ला सकता है, जिन्होंने पेपर लीक के बाद आत्महत्या कर ली? लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ. दो साल पहले भी कानून बनाया गया था, लेकिन पेपर लीक फिर भी नहीं रुका.

पठान ने कहा कि छात्रों की सबसे बड़ी मांग यह थी कि भविष्य में किसी भी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक न हो और इसके लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए. छात्रों ने शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद Government को उनकी मांगों पर विचार करना पड़ा. Government का रवैया विरोधाभासी दिखाई देता है. एक तरफ छात्रों को भरोसा दिया गया है कि उनके खिलाफ दर्ज First Information Report वापस ली जाएंगी. दूसरी ओर, छात्रों को नोटिस भेजे जा रहे हैं और उनके social media अकाउंट्स पर कार्रवाई की जा रही है.

प्रदर्शनकारी छात्रों और जेनजी को लेकर BJP MP कंगना रनौत की टिप्पणियों पर वारिस पठान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल पूरी तरह निंदनीय है और एक जनप्रतिनिधि से इस तरह की भाषा की अपेक्षा नहीं की जाती. कंगना रनौत को सार्वजनिक रूप से छात्रों और जेनजी से माफी मांगनी चाहिए. इस प्रकार के बयान केवल अनावश्यक विवाद पैदा करते हैं और सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी वर्ग या पीढ़ी के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग स्वीकार्य नहीं होना चाहिए.

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