
तिरुवनंतपुरम, 30 जुलाई . विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) ने आठ साल पुराने विवाद को खत्म करते हुए Chief Minister वी.डी. सतीशन के खिलाफ उस मामले की जांच बंद कर दी है, जिसमें 2018 में केरल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद घरों के पुनर्निर्माण के लिए यूके में फंड इकट्ठा करने के आरोप लगे थे.
इस फैसले की घोषणा करते हुए राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने Thursday को कहा कि विजिलेंस जांच में Chief Minister के किसी भी गलत काम का कोई सबूत नहीं मिला है और वीएसीबी डायरेक्टर की अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद इस मामले को औपचारिक रूप से बंद कर दिया गया है.
चेन्निथला ने पत्रकारों से कहा, “इस मामले में विजिलेंस का कोई पहलू नहीं है और केस बंद कर दिया गया है. अब यह साफ हो गया है कि यह मामला Political बदले की भावना से प्रेरित था.”
गृह मंत्री ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से फाइल की विस्तार से जांच की और सतीशन का किसी भी गैरकानूनी काम से कोई संबंध नहीं पाया.
उन्होंने बताया कि पिछली पिनाराई विजयन Government के दौरान हुई दो अलग-अलग जांचों में भी कोई दोषी साबित करने वाला सबूत नहीं मिला था और वीएसीबी की अंतिम रिपोर्ट ने भी इसी बात की पुष्टि की है.
ये आरोप सतीशन की उस कोशिश से जुड़े थे, जिसमें उन्होंने 2018 की बाढ़ से बर्बाद हुए परिवारों के लिए घर बनाने के वास्ते यूके में रहने वाले मलयाली समुदाय से आर्थिक मदद जुटाने का प्रयास किया था.
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मनप्पट्टू फाउंडेशन के जरिए लगभग 20 लाख रुपए इकट्ठा किए गए और यह पैसा यूके-स्थित मिडलैंड इंटरनेशनल एड ट्रस्ट के माध्यम से फाउंडेशन के एफसीआरए खाते में भेजा गया.
विजिलेंस की शिकायत में कहा गया कि 22,500 जीबीपी (लगभग 19.95 लाख रुपए) का ट्रांसफर फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (एफसीआरए) की धारा 3 का उल्लंघन है, जो राजनेताओं को विदेशी चंदा लेने से रोकती है.
कई सालों तक चली कई दौर की जांच पड़ताल के बाद जांचकर्ताओं को सतीशन के खिलाफ कोई आपराधिक गतिविधि या विजिलेंस से जुड़ा कोई अपराध साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं मिला, जिससे यह मामला बंद करने का रास्ता साफ हो गया.
यह विवाद तब शुरू हुआ , जब सीपीआई(एम) के पूर्व विधायक जेम्स मैथ्यू ने यह मुद्दा उठाया, जिसके बाद तत्कालीन वामपंथी Government ने विजिलेंस की कार्रवाई शुरू की.
लंबे समय तक चली जांच के दौरान सतीशन ने विधानसभा और सार्वजनिक रूप से लगातार यही कहा कि उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए मानवीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए ही काम किया था और कोई गलत काम नहीं किया था.
वीएसीबी के जांच पूरी करने के साथ ही वह मामला अब असल में खत्म हो गया है, जिसने लगभग आठ सालों तक सतीशन के सार्वजनिक जीवन पर साया डाले रखा था. इससे Chief Minister को 2018 की बाढ़ के बाद पुनर्वास के कामों से जुड़े सबसे लंबे समय से चल रहे Political विवादों में से एक में पूरी तरह बेदाग साबित होने का दावा करने का मौका मिल गया है.
–
एसएचके/
Skip to content