[वीडियो] डुअल पिक्सेल प्रो: हर बहमूल्य पल को कैद करने के लिए बेहतर ऑटोफोकस

चाहे आप जल्दी-जल्दी घट रही किसी घटना की तस्वीर लेने की कोशिश कर रहे हों या फिर दोस्तों के साथ आराम से बिताए जाने वाले समय में से किसी खुशनुमा पल की, किसी भी स्थिति में शायद ही कोई ऐसा कैमरा फीचर हो जो फोटोग्राफी के अनुभव और तस्वीर की गुणवत्ता पर इतना असर डालता हो, जितना कि ऑटोफोकस. मोबाइल फोटोग्राफी टेक्नोलॉजी का एक स्तंभ ऑटोफोकस, यह सुनिश्चित करता है कि आप किसी भी पल को उसी समय अपने कैमरे में कैद कर सकें, जब वह घट रहा हो और उसे एक शानदार तस्वीर के रूप में निकाल सकें, जिसे किसी को भी दिखाया जा सकता हो.

 

यह सुनिश्चित करने के लिए कि आप कभी भी उस क्षण को चूक न जाएं, सैमसंग ने अपनी ऑटोफोकस टेक्नोलॉजी को एक बिलकुल नए सिस्टम के साथ बेहतर बनाया है जो हर स्नैप में ट्रैक-शार्प तस्वीरें देता है. इस सिस्टम को डुअल पिक्सेल प्रो का नाम दिया गया है.

 

फेज डिटेक्शन ऑटोफोकस क्या है?

डुअल पिक्सेल प्रो कैसे काम करता है, यह समझने के लिए पहले फेज़ डिटेक्शन ऑटोफोकस (PDAF) को जानना ज़रूरी है क्योंकि यही वह नींव है जिस पर डुअल पिक्सेल प्रो तकनीक आधारित है.

 

 

जिस तरह इंसान फोकस करने के लिए अपनी दोनों आंखों का इस्तेमाल करता है, PDAF भी लेफ्ट-लुकिंग और राइट-लुकिंग पिक्सेल द्वारा उत्पन्न इमेज में फेज़ असमानताओं की तुलना कर काम करता है. यह फोकस की दूरी, या उस जगह की गणना करने में कैमरे की मदद करता है, जहां दोनों फेज़ एक-दूसरे से मिलते हैं.

 

पारंपरिक फेज़ डिटेक्शन सिस्टम विशेष, डेडिकेटेड ऑटोफोकस पिक्सेल का इस्तेमाल करता है, जो पूरे सेंसर पर लगे होते हैं. ये पिक्सेल कुल पिक्सेल का सिर्फ एक छोटा हिस्सा होते हैं. लेफ्ट-लुकिंग और राइट-लुकिंग ईमेज तैयार कर उनकी तुलना के लिए हर पिक्सेल का आधा हिस्सा धातु से ढका होता है ताकि वे लेंस के केवल एक हिस्से से लाइट हासिल कर सकें. इन डेडिकेटेड ऑटोफोकस पिक्सेल को बड़ी संख्या में इस्तेमाल कर फेज़ डिटेक्शन को और तेज़ किया जा सकता है, लेकिन इससे सिस्टम में कैद रोशनी की मात्रा कम हो जाती है, जिससे तस्वीर की गुणवत्ता में कमी आ जाती है. यहीं डुअल पिक्सेल तकनीक ऑटोफोकस को अगले स्तर तक ले जाती है.

 

हर पिक्सेल को डुअल पिक्सेल ऑटोफोकस का साथ

सैमसंग की डुअल पिक्सेल टेक्नोलॉजी के साथ सेंसर पर मौजूद हर पिक्सेल का इस्तेमाल फेज़ डिटेक्शन के लिए होता है, जबकि उसी के साथ रंगों से जुड़ी जानकारी भी हासिल होती रहती है. इससे पारंपरिक सिस्टम की तुलना में ऑटोफोकस की गति और सटीकता में ज़बर्दस्त सुधार होता है.

 

डुअल पिक्सेल सेंसर पर मौजूद हर पिक्सेल में दो फोटोडायोड होते हैं, एक का मुंह बाईं ओर होता है (लेफ्ट-लुकिंग) और दूसरे का दाहिनी ओर (राइट-लुकिंग). जब कोई दृश्य कैद किया जाता है, तो फोटोडायोड की हर जोड़ी के सारे फेज़ की आपस में तुलना कर मिलीसेकंड के भीतर ऑटोफोकस हासिल कर लिया जाता है. चूंकि सेंसर के हर पिक्सेल का इस्तेमाल ऑटोफोकस और कलर वैल्यू के लिए होता है, इसलिए सेंसर बिना तस्वीर की गुणवत्ता में कमी लाए शीघ्रता से ऑटोफोकस प्राप्त कर सकता है.

डुअल पिक्सेल प्रो देता है नेक्स्ट-जेन ऑटोफोकस

डुअल पिक्सेल प्रो ऑटोफोकस को एक नए स्तर पर ले जाता है. यह हरे पिक्सेल का इस्तेमाल करता है जो तिरछी रेखा से फोटोडायोड को बांटता है. एक कोने से दूसरे कोने के बीच सीधी रेखा से बंटे पिक्सेल बाएं और दाएं में फेज़ अंतर के साथ ही पिक्सेल के ऊपर और नीचे के बीच फेज़ अंतर की भी तुलना करते हैं.

 

परिणामस्वरूप, डुअल पिक्सेल प्रो कम रोशनी या तेज़ गति से जाते सब्जेक्ट जैसी मुश्किल परिस्थितियों में भी तुरंत और सटीक ऑटोफोकस देता है. यह डुअल पिक्सेल टेक्नोलॉजी की कुछ सीमाओं, जैसे- समांतर क्षैतिज पट्टियों जैसे पैटर्न के बाएं और दाहिनी ओर में अंतर नहीं कर पाना, का भी समाधान करता है. ऊपर और नीचे के फेज़ डिटेक्शन को भी शामिल करने का मतलब है कि अब आपका कैमरा इन पैटर्न में भी बेहतर अंतर ज़ाहिर कर सकता है. इससे यदि सामने किसी ने पैटर्न वाली या क्षैतिज लाइनों वाली शर्ट पहन रखी हो, तो भी आपका कैमरा तुरंत फोकस हासिल कर सकता है.

 

अपने किसी प्रियजन की एक नज़र से लेकर दिलकश आतिशबाज़ी के प्रदर्शन तक, अक्सर हमारे सबसे बहुमूल्य पल एकाएक आते हैं और तुरंत गुज़र जाते हैं. डुअल पिक्सेल प्रो ऑटोफोकस सिस्टम से लैस ISOCELL ईमेज सेंसर यह सुनिश्चित करता है कि आपका यह पसंदीदा पल आपसे नज़रें चुरा कर न निकलने पाए.

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