
New Delhi, 5 जुलाई . विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच कर रहे अधिकारी को पत्र लिखकर कांग्रेस नेता और Lok Sabha सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, राज्यसभा सदस्य संजय सिंह और Samajwadi Party के महासचिव रामगोपाल यादव समेत अन्य नेताओं के बयान दर्ज करने की मांग की है.
वीएचपी ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस पत्र की जानकारी शेयर की. यह पत्र अयोध्या के डीएसपी और First Information Report संख्या 0090/2026, थाना राम जन्मभूमि के जांच अधिकारी अशुतोष तिवारी को भेजा गया है. यह First Information Report राम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावे मामले की जांच से जुड़ी है.
पत्र में कहा गया है कि इस मामले को लेकर कई सार्वजनिक हस्तियों ने टीवी चैनलों, social media और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. इन लोगों ने सार्वजनिक रूप से बड़े दावे किए हैं, इसलिए निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए इन लोगों के बयान दर्ज किए जाने चाहिए.
पत्र में रामगोपाल यादव के उस बयान का जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने राम मंदिर में करीब 20,000 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया था. उन्होंने दावा किया था कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए 50-50 किलो सोना, चांदी, बहुमूल्य हार और करोड़ों रुपए की नकदी गायब है और इस मामले में सिर्फ छोटे कर्मचारी ही नहीं, बल्कि कई बड़े और प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं.
अरविंद केजरीवाल के उन बयानों का भी जिक्र किया गया है, जिनमें केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि भगवान राम का हार, चरण पादुकाएं, हीरे, आभूषण, चांदी की ईंटें, चांदी के दीपक और भारी मात्रा में नकदी चोरी हो गई है. उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह भी दावा किया था कि करीब 200 करोड़ रुपए नकद और कीमती हीरे-जवाहरात गायब हैं. साथ ही उन्होंने कहा था कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो Government भी गिर सकती है.
पत्र में राज्यसभा सदस्य संजय सिंह के बयान का भी जिक्र किया गया है. कहा गया है कि संजय सिंह ने दावा किया था कि राम मंदिर के दान पात्रों से 200 करोड़ रुपए से अधिक की चोरी हुई है और इसमें 50 से ज्यादा कर्मचारियों की संलिप्तता है.
Lok Sabha सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान का भी जिक्र है, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या छोटे कर्मचारी अकेले cctv बंद कर हजारों करोड़ रुपए के चढ़ावे में हेराफेरी कर सकते हैं या इसके पीछे कुछ बड़े लोगों की मिलीभगत है.
पत्र में आलोक कुमार ने कहा कि इन सभी नेताओं ने सार्वजनिक रूप से गंभीर आरोप लगाए हैं और निश्चित रकम का भी जिक्र किया है. ऐसे में यह माना जा सकता है कि वे मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित हैं, इसलिए जांच एजेंसी को कानून के तहत उन्हें बुलाकर उनके बयान दर्ज करने चाहिए.
आलोक कुमार ने जांच अधिकारी से आग्रह किया कि संबंधित नेताओं से यह पूछा जाए कि उनके आरोपों का तथ्यात्मक आधार क्या है, उन्हें यह जानकारी कहां से मिली और उनके पास इन दावों के समर्थन में कौन-कौन से दस्तावेज या अन्य साक्ष्य मौजूद हैं.
पत्र में कहा गया है कि यदि ये लोग अपने आरोपों के समर्थन में विश्वसनीय सामग्री उपलब्ध कराते हैं तो इससे जांच एजेंसी को सच्चाई तक पहुंचने में मदद मिलेगी, लेकिन यदि जांच में यह सामने आता है कि इतने गंभीर आरोप बिना किसी तथ्य या सबूत के लगाए गए हैं, तो यह भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू होगा.
आलोक कुमार ने पत्र के अंत में कहा कि यदि कोई व्यक्ति बिना किसी आधार के जानबूझकर झूठे या लापरवाहीपूर्ण आरोप लगाता है, जिससे समाज में नफरत, दुर्भावना या वैमनस्य फैलने की आशंका हो, तो जांच एजेंसी कानून के तहत उचित कार्रवाई पर विचार कर सकती है.
उन्होंने कहा कि किसी को भी बेबुनियाद आरोप लगाकर बच निकलने की अनुमति नहीं दी जा सकती और ऐसे मामलों में कानून अपना काम करेगा.
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डीकेपी
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