
वाराणसी/Bhopal , 2 मई . Prime Minister Narendra Modi की वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ धाम की हालिया यात्रा ने ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया है.
Prime Minister मोदी ने 29 अप्रैल को प्रार्थना करने के बाद वैदिक घड़ी का अवलोकन किया और इसे “प्राचीन ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण का शानदार संगम” बताया. उनके इस कथन ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यापक प्रतिक्रिया को जन्म दिया, आधिकारिक चैनलों पर लाइव प्रसारण को हजारों दर्शकों ने देखा और टेलीविजन कवरेज लाखों लोगों तक पहुंचा. विभिन्न प्लेटफार्मों पर 78 लाख से अधिक लोगों ने इसे देखा.
Madhya Pradesh Government द्वारा Saturday को जारी एक बयान के अनुसार, हैशटैग ‘विक्रमोत्सव वाराणसी’ India के ट्रेंडिंग सेक्शन में पहले स्थान पर रहा, जबकि कई संबंधित हैशटैग ने भी काफी लोकप्रियता हासिल की. अधिकारियों ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिली इस सशक्त प्रतिक्रिया से India की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और उनकी समकालीन प्रासंगिकता में बढ़ती रुचि झलकती है.
बता दें कि उज्जैन के महाराजा विक्रमादित्य अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित वैदिक घड़ी को Chief Minister मोहन यादव ने उत्तर प्रदेश के Chief Minister योगी आदित्यनाथ को भेंट किया था और इसे 4 अप्रैल को मंदिर परिसर में स्थापित किया गया था.
Madhya Pradesh Government के एक अधिकारी ने इस पहल के महत्व को समझाते हुए कहा कि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी India की प्राचीन समय प्रणाली की वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करती है और इसे आधुनिक पीढ़ी के लिए सुलभ प्रारूप में प्रस्तुत करने का प्रयास है.
अधिकारी ने आगे कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य पारंपरिक खगोलीय ज्ञान के प्रति जागरूकता को पुनर्जीवित करना और इसे समकालीन तकनीक के साथ जोड़ना है.
पारंपरिक घड़ियों के विपरीत, वैदिक घड़ी सूर्योदय पर आधारित 30 घंटे के चक्र का अनुसरण करती है और समय को 30 मुहूर्तों में विभाजित करती है. यह तिथि, नक्षत्र, योग, करण और ग्रहों की स्थिति सहित विस्तृत पंचांग तत्व भी प्रदर्शित करती है, जिससे पारंपरिक भारतीय पंचांग प्रणाली की व्यापक समझ मिलती है.
इस पहल को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से डिजिटल क्षेत्र में भी विस्तारित किया गया है, जो गूगल प्ले स्टोर और एप स्टोर पर उपलब्ध है. 189 से अधिक भाषाओं का समर्थन करने वाला यह ऐप सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, शुभ और अशुभ समय और महाIndia काल से लेकर वर्तमान तक के 7,000 वर्षों के पंचांग की जानकारी प्रदान करता है. इसमें वैदिक समय प्रणाली पर आधारित अलार्म की सुविधा भी शामिल है.
Madhya Pradesh Government के एक अन्य अधिकारी ने भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वाराणसी में इस पहल की सफलता के बाद देश भर के प्रमुख धार्मिक स्थलों, जिनमें प्रमुख ज्योतिर्लिंग स्थल और अयोध्या का राम मंदिर में इसी तरह की वैदिक घड़ियां स्थापित करने की योजना है, ताकि इस ज्ञान परंपरा को व्यापक जनसमूह तक पहुंचाया जा सके.
अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना न केवल एक सांस्कृतिक स्थापना है, बल्कि India की पारंपरिक वैज्ञानिक विरासत को वैश्विक स्तर पर ले जाने की दिशा में भी एक कदम है. प्राचीन ज्ञान को आधुनिक पहुँच के साथ जोड़कर, विक्रमादित्य वैदिक घड़ी इस बात का प्रतीक बन गई है कि कैसे विरासत और प्रौद्योगिकी मिलकर सार्थक जनभागीदारी का सृजन कर सकते हैं.
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ओपी/डीकेपी
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