वरुण बेवरेजेस, अमूल, आईटीसी और हल्दीराम का यूपी पर भरोसा, खाद्य प्रसंस्करण को मिली नई उड़ान

Lucknow, 12 अगस्त . उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादों को उद्योग और रोजगार से जोड़ने की दिशा में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है. प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी 40 परियोजनाओं को लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी किए गए हैं. इनमें पूर्वांचल और मध्यांचल की 21 से अधिक परियोजनाएं शामिल हैं. वरुण बेवरेजेस, अमूल, आईटीसी, बालाजी वेफर्स और हल्दीराम जैसे बड़े ब्रांडों का निवेश यह संकेत दे रहा है कि प्रदेश के ये क्षेत्र तेजी से नए खाद्य प्रसंस्करण केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं.

एक अधिकारी ने बताया कि पूर्वांचल में 10 परियोजनाओं के जरिए प्रयागराज, अमेठी, वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, बाराबंकी और देवरिया जैसे जिलों में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है. वरुण बेवरेजेस की प्रयागराज, अमेठी और गोरखपुर क्षेत्र में परियोजनाएं हैं, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश में पेय पदार्थ निर्माण से जुड़े औद्योगिक तंत्र को मजबूती मिलने की संभावना है.

उन्होंने बताया कि गोरखपुर में सीपी मिल्क एंड फूड प्रोडक्ट्स अपनी मौजूदगी का विस्तार कर रही है, जबकि बनासकांठा डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन (अमूल) की वाराणसी में डेयरी परियोजना क्षेत्र में बढ़ते निवेश का अहम उदाहरण है. रसिक रिफ्रेशमेंट और फॉरएवर डिस्टिलरी की परियोजनाएं भी पूर्वांचल में खाद्य एवं पेय पदार्थ क्षेत्र के विस्तार को दर्शाती हैं. इन परियोजनाओं के जरिए किसानों, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला, परिवहन और संगठित विनिर्माण के बीच बेहतर तालमेल बनने की उम्मीद है. साथ ही, विभिन्न जिलों में निवेश पहुंचने से औद्योगिक विकास को पारंपरिक औद्योगिक केंद्रों से आगे ले जाने में मदद मिलेगी.

मध्यांचल भी खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के बड़े केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है. यहां 12 परियोजनाओं को एलओसी जारी किया गया है. हरदोई में वरुण बेवरेजेस, आईटीसी, बालाजी वेफर्स और हल्दीराम जैसी कंपनियों की परियोजनाएं जिले को खाद्य प्रसंस्करण के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित कर रही हैं. Kanpur देहात में एचएल एग्रो प्रोडक्ट्स विस्तार कर रही है, जबकि सीतापुर में रेडिको खेतान और डालमिया चीनी मिल्स कृषि आधारित औद्योगिक गतिविधियों को मजबूती दे रही हैं.

इसके अलावा, यूनाइटेड ब्रेवरीज, ग्लोबस स्पिरिट्स, नील श्री शुगर और आरएसपीएल लिमिटेड की परियोजनाएं भी क्षेत्र में प्रस्तावित हैं. इन परियोजनाओं को जारी एलओसी राज्य की निवेशक-केंद्रित औद्योगिक नीति को रेखांकित करते हैं. कंपनियों को उनकी जरूरत के अनुरूप प्रोत्साहन और नीतिगत सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है. इसका उद्देश्य नई इकाइयों की स्थापना के साथ मौजूदा उद्योगों के विस्तार और कारोबार में विविधता को बढ़ावा देना है.

विशाल कृषि आधार, बेहतर कनेक्टिविटी और मजबूत औद्योगिक बुनियादी ढांचे के साथ उत्तर प्रदेश जिला-आधारित खाद्य प्रसंस्करण तंत्र विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इससे कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन, किसानों के लिए बाजार के नए अवसर, रोजगार सृजन और प्रदेश की एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को गति मिलने की उम्मीद है.

विकेटी/डीकेपी