वाजपेयी सरकार ने 200 करोड़ की होटल लक्ष्मीविलास को बेचा था मात्र 7 करोड़ में, 8 साल बाद कोर्ट ने माना विनिवेश में भ्रष्टाचार हुआ · Indias News

वाजपेयी सरकार ने 200 करोड़ की होटल लक्ष्मीविलास को बेचा था मात्र 7 करोड़ में, 8 साल बाद कोर्ट ने माना विनिवेश में भ्रष्टाचार हुआ

18 साल बाद कोर्ट ने माना विनिवेश में भ्रष्टाचार हुआ : नायक

उदयपुर (Udaipur). विश्व प्रसिद्ध फतहसागर झील किनारे आईटीडीसी के सितारा होटल (Hotel) को एनडीए सरकार (Government) के समय विनिवेश योजना के तहत मात्र साढ़े सात करोड़ रुपए में बेच देने का पुरजोर विरोध करने में अग्रणी रहे होटल (Hotel) के ही कर्मचारी अम्बालाल नायक ने लगातार 18 साल संघर्ष किया. पहले हाईकोर्ट और उसके बाद CBIकी चौखट पर खूब ठोकरें खाई. जांच दर जांच आखिर CBIकोर्ट-जोधपुर ने मामले में भ्रष्टाचार माना और होटल (Hotel) को पजेशन में लेने का जिला प्रशासन को आदेश दिया.

नायक ने बताया कि फरवरी 2002 में होटल (Hotel) के विनिवेश से पहले ही उन्होंने 20 फरवरी 2002 को विनिवेश मंत्रालय में विरोध दर्ज कराते हुए कहा था कि यह गलत हो रहा है क्योंकि होटल (Hotel) सम्पत्ति का टाइटल क्लियर नहीं है लेकिन उनकी दलील को ये कह कर खारिज कर दिया गया कि वह उपयुक्त मंच पर इस मामले को ले जाएं. तब नायक ने अप्रेल 2002 में राजस्थान (Rajasthan) हाईकोर्ट में रिट लगाई जिसमें बताया कि होटल (Hotel) को 7.50 करोड़ रुपए में बेच दिया गया जबकि उसकी वेल्यू 200 करोड़ रुपए से ज्यादा है लेकिन हाईकोर्ट के तत्कालीन जज ने सबूत पर्याप्त न बताते हुए रिट खारिज कर दी व पर्याप्त सबूत के साथ आने को कहा. इस पर होटल (Hotel) की सम्पत्ति की वेल्यूशन निकलवाई जिसमें इसकी कीमत 150 करोड़ रुपए आंकी गई. तब इसकी सम्पत्तियों का एसेसमेंट नहीं करने दिया गया था.

इसकी रिपोर्ट तत्कालीन उदयपुर (Udaipur) जिला कलेक्टर (Collector) विनोद कपूर ने भी पेश की. इसके बाद दुबारा पेश नई रिट को भी हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया. नायक ने बताया कि तब उन्होंने हथियार डाल दिए और CBIको एप्रोच करना शुरू किया. आखिर एसपी एनएच यादव ने शिकायत सुनने के बाद दो अधीनस्थ अधिकारियों को जांच करने के निर्देश दिए. जांच रिपोर्ट में एसपी यादव ने मामला गड़बड़ मानते हुए ततकालीन CBIनिदेशक रंजीत सिन्हा से स्वीकृति लेकर एफआईआर (First Information Report) दर्ज की. इस आधार पर मामले में सालभर चली जांच में होटल (Hotel) की कम कीमत आंकने के पीछे नॉन कंस्ट्रक्शन जोन की कम कीमत का तर्क दिया गया जो गलत निकला.

जांच में माना कि जब उदयपुर (Udaipur) में ही होटल (Hotel) रेडीसन के निर्माण की स्वीकृति सरकार (Government) ने दी तो लक्ष्मीविलास होटल (Hotel) परिसर की खाली भूमि में भी तो मिल ही सकती है. एक कारण होटल (Hotel) परिसर से हाईटेंशन लाइन का गुजरना बताया गया. इस बारे में पूछने पर बिजली बोर्ड ने कभी वहां लाइन होने से ही इंकार कर दिया. CBIने पूरे मामले में करीब 350 करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार माना. एसपी यादव ने कोर्ट में चार्जशीट पेश करने की स्वीकृति भी ले ली लेकिन बाद में वे सेवाविृत्त हो गए. इसके बाद CBIने वापस जांच के निर्देश दिए. केंद्र सरकार (Government) के निर्देशानुसार जांच के बाद CBIने 13 अगस्त 2019 को क्लोजर रिपोर्ट लगा दी जिसे CBIकोर्ट ने स्वीकार नहीं कर मामले की वापस जांच कर एक माह में रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए.

आखिर में पेश जांच रिपोर्ट में CBIजज ने माना कि इस सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है. मामला अभी कोर्ट में लंबित है. नौकरी गई, वाजपेयी की सभा के बाहर से भी पुलिस (Police) ने उठाया नायक ने बताया कि करीब 18 साल के संघर्ष के शुरुआती दौर काफी कठिन रहा. समझौता करने के लिए काफी दबाव आए. विरोध के चलते वर्ष 2003 में नौकरी भी खोनी पड़ी. वर्ष 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की उदयपुर (Udaipur) के गांधी ग्राउंड में चुनावी सभा थी जहां वे होटल (Hotel) विनिवेश के खिलाफ पोस्टर लगा अपना विरोध प्रदर्शित कर रहे थे. भनक लगने पर पुलिस (Police) ने उन्हें वहां से उठा जिप्सी में बिठा दिया और बलीचा में ले जाकर छोड़ दिया. बाद में भी समझौता करने के लिए दबाव बनाया लेकिन वे नहीं झुके और अंत तक डटे रहे.

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