
New Delhi, 8 जुलाई . अमेरिका ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके एक सहयोगी के खिलाफ आरोप तय किए हैं. इस आरोप से साबित होता है कि अलगाववादी की हत्या India Government की नहीं बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेट की कारस्तानी थी.
33 वर्षीय लॉरेंस बिश्नोई “बिश्नोई गैंग” का प्रमुख है. उसे India और विदेशों में कई चर्चित अपराधों के लिए जाना जाता है. फिलहाल वो जेल में बंद है.
इससे पहले लगाए गए आरोपों ने विशेष रूप से कनाडा और India के बीच राजनयिक संबंधों को गंभीर संकट में डाल दिया था. निज्जर कनाडाई नागरिक और सिख अलगाववादी नेता था, जो खालिस्तान के निर्माण के अभियान से जुड़ा था. India ने उसे आतंकवादी घोषित किया था और उस पर हिंसक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था.
18 जून 2023 को वैंकूवर के पास ‘सरे’ शहर में एक गुरुद्वारे के बाहर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. ये हत्या कनाडा-India संबंधों में तनाव का बड़ा कारण बन गई.
उस समय के कनाडाई Prime Minister जस्टिन ट्रूडो ने कहा था कि कनाडाई अधिकारी ऐसे “विश्वसनीय आरोपों” की सक्रिय रूप से जांच कर रहे हैं, जिनमें हत्या को भारतीय सरकारी एजेंटों से जोड़ा जा रहा है.
India ने इन आरोपों को “बेतुका” बताते हुए खारिज कर दिया था. हालांकि, इन आरोपों के कारण दोनों देशों के बीच बड़ा राजनयिक संकट पैदा हुआ, जिसमें राजनयिकों को निष्कासित करना और द्विपक्षीय संबंधों को रोकना शामिल था.
अब अमेरिका ने एक आरोप-पत्र सार्वजनिक किया है, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ पर निज्जर की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है.
आरोपों के अनुसार, बिश्नोई ने India की जेल में रहकर हत्याकांड को लेकर निर्देश दिया, जबकि बराड़ ने उत्तरी अमेरिका में इसकी गतिविधियों की निगरानी की. महत्वपूर्ण बात यह है कि इस आरोप-पत्र में निज्जर की हत्या में India Government की किसी भूमिका का उल्लेख नहीं किया गया है.
Wednesday को भारतीय समयानुसार प्रसारित कनाडाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (सीबीसी न्यूज) की रिपोर्ट के अनुसार, रॉयल कैनेडियन माउंटेड Police (आरसीएमपी) की उप आयुक्त लिसा मोरलैंड ने एक साक्षात्कार में कहा, “जांच में भारतीय अधिकारियों की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला.”
रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय Government ने जांच में सहयोग किया.
कई अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स ने भी कहा कि लगाए गए आरोप संगठित अपराध नेटवर्क पर केंद्रित हैं, जिससे India Government की कथित संलिप्तता के पहले के कनाडाई आरोप कमजोर पड़ते हैं.
सीएनएन ने Wednesday को रिपोर्ट किया कि लॉस एंजिलिस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी अधिकारियों (जिनमें फर्स्ट असिस्टेंट यूएस अटॉर्नी बिल एस्ली भी शामिल थे) ने यह आरोप नहीं लगाया कि भारतीय Government हत्या में शामिल थी या उसे इसकी जानकारी थी.
कनाडा के सार्वजनिक बयानों के कारण India को काफी हद तक दोषी ठहराया गया था, जिनमें सरकारी संलिप्तता का संदेह जताया गया था. India ने इन आरोपों का कड़ा खंडन किया था.
अब यह मामला निज्जर की हत्या को किसी राज्य प्रायोजित कार्रवाई के बजाय एक अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध अभियान के रूप में पेश करता है.
कनाडा के समाचार पत्र द ग्लोब एंड मेल ने Wednesday को हत्या और उसके बाद पैदा हुए विवाद को “भू-Political संकट का कारण” बताया. अखबार ने कहा कि बिश्नोई और उसके सहयोगियों के खिलाफ अमेरिकी अभियोग में इस दावे का कोई उल्लेख नहीं है कि भारतीय Government के एजेंट हत्या के पीछे थे.
पिछले साल अक्टूबर में कनाडा के टोरंटो सन अखबार ने लिखा था कि वर्षों के अविश्वास और आरोप-प्रत्यारोप के बाद कनाडा और India के बीच तनावपूर्ण संबंध अब सुधरने लगे हैं.
अखबार ने कहा कि कनाडा के Prime Minister मार्क कार्नी द्वारा भारतीय Prime Minister को बातचीत के लिए आमंत्रित करना इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के संबंध सामान्य हो रहे हैं. यह टिप्पणी कार्नी के पूर्ववर्ती कार्यकाल में खराब हुए संबंधों के संदर्भ में की गई थी.
रिपोर्ट में कहा गया, “दो साल पहले कनाडा के पूर्व Prime Minister जस्टिन ट्रूडो द्वारा संसद में सार्वजनिक रूप से यह आरोप लगाने के बाद India के साथ संबंध खराब हो गए थे कि मोदी Government ने जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया के एक गुरुद्वारे की पार्किंग में प्रमुख सिख अलगाववादी निज्जर की हत्या करवाई.”
रिपोर्ट में पूर्व कनाडाई राजनयिक और मैकडोनाल्ड-लॉरियर इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो एलन केसल के हवाले से कहा गया कि कार्नी द्वारा India के साथ संबंध सुधारने की पहल और अल्बर्टा में जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए Prime Minister मोदी को आमंत्रित करने के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार शुरू हुआ.
केसल ने कहा, “यह स्पष्ट संकेत था कि कनाडा फिर से बातचीत की दिशा में लौट रहा है और अलगाव की नीति नहीं अपना रहा.”
सितंबर 2023 में ट्रूडो ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि निज्जर की हत्या में भारतीय Government की संलिप्तता के “विश्वसनीय सबूत” हैं.
India ने तुरंत इन आरोपों को “बेतुका” बताते हुए खारिज कर दिया था. इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के वरिष्ठ राजनयिकों को निष्कासित किया, व्यापार वार्ताएं रोक दीं और मंत्रिस्तरीय संवाद निलंबित कर दिए.
कनाडा में Political बदलाव और मई 2025 में मार्क कार्नी के Prime Minister बनने के बाद ओटावा ने India के प्रति अपनी नीति पर दोबारा विचार किया.
कार्नी ने पिछले साल अल्बर्टा में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान Prime Minister मोदी से मुलाकात की और संबंधों को फिर से पटरी पर लाने पर सहमति जताई. इसके बाद दोनों देशों ने अपने-अपने उच्चायुक्तों की नियुक्ति बहाल की, वीजा सेवाएं फिर शुरू हुईं और व्यापार, ऊर्जा, पर्यावरण तथा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मंत्रिस्तरीय बातचीत दोबारा शुरू हुई. साथ ही दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारियों ने साझा चिंताओं को लेकर सूचनाओं का आदान-प्रदान शुरू किया.
–
केआर/
Skip to content