पीओके में अशांति ने पाकिस्तान के खोखले और अवसरवादी चरित्र को उजागर किया: रिपोर्ट

इस्लामाबाद, 15 अगस्त . Pakistan अधिकृत कश्मीर (पीओके) में बढ़ती अशांति ने इस्लामाबाद के खोखले और अवसरवादी चरित्र को उजागर कर दिया है. आर्थिक शोषण, Political दमन और समय-समय पर की जाने वाली कार्रवाई से पता चलता है कि Pakistan का शासन मॉडल किस तरह काम करता है. यह बात ‘खालसा वॉक्स’ की एक रिपोर्ट में कही गई है.

रिपोर्ट के अनुसार, Pakistan दुनिया को कश्मीर पर उपदेश देता है, जबकि वह खुद पीओके पर अवैध कब्जा किए हुए है. Pakistan का प्रतिष्ठान पीओके के लोगों को तब महत्व देता है, जब वे India के साथ कश्मीर को अधूरा एजेंडा बताने वाले उसके नैरेटिव को मजबूत करते हैं. लेकिन जब यही लोग अपने बुनियादी अधिकारों की मांग करते हैं, तो उन्हें “दुश्मन” करार दिया जाता है. वहीं, चुनावी समीकरणों की जरूरत पड़ने पर उन्हें अचानक “देशभक्त” बता दिया जाता है.

रिपोर्ट में कहा गया कि पीओके में हालिया विरोध प्रदर्शनों को लेकर इस्लामाबाद का बदला हुआ रुख Political मजबूरी को दर्शाता है. यह भी बताता है कि Pakistan लंबे समय से इस क्षेत्र के निवासियों को समान नागरिकों के बजाय अपने नियंत्रण में रहने वाली आबादी के तौर पर देखता रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, Pakistan के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा प्रदर्शनकारियों को “India जैसे दुश्मन” बताए जाने के कुछ ही दिनों बाद Prime Minister शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने प्रतिबंधित ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) से जुड़े 99 प्रतिशत लोगों को “हमारे देशभक्त भाई” बताया.

रिपोर्ट में कहा गया, “आतंकवादी और गद्दार से अचानक देशभक्त भाई में हुआ यह बदलाव Pakistan के खोखले और अवसरवादी चरित्र को उजागर करता है.”

रिपोर्ट के अनुसार, पीओके में आम लोग महीनों से बढ़ती महंगाई, बिजली की दरों, खराब शासन व्यवस्था और ऐसी विधायी व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें वास्तविक सत्ता इस्लामाबाद के हाथों में रखने की व्यवस्था है. रिपोर्ट में दावा किया गया कि Pakistanी Political दल लंबे समय से 12 आरक्षित “शरणार्थी” सीटों का इस्तेमाल अपनी पसंद की Government स्थापित करने के लिए करते रहे हैं.

रिपोर्ट में कहा गया कि जब जेएएसी ने इस व्यवस्था और क्षेत्र की व्यापक उपेक्षा के खिलाफ आंदोलन किया तो समूह को आतंकवाद रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया, इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं, बल प्रयोग किया गया और गोलीबारी हुई. रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें दर्जनों नागरिक मारे गए हैं और जून से अब तक मृतकों की संख्या कम से कम 90 हो गई है. अस्पतालों पर कथित तौर पर कब्जा किए जाने, चिकित्सा सहायता में बाधा डालने और पत्रकारों को क्षेत्र से दूर रखने का भी दावा किया गया है.

रिपोर्ट ने पीओके में होने वाले तथाकथित विधानसभा चुनावों को लेकर भी सवाल उठाए. इसमें कहा गया कि इन चुनावों में उम्मीदवारों के लिए Pakistan के प्रति अपनी निष्ठा की पुष्टि करना अनिवार्य है.

रिपोर्ट के मुताबिक, जेएएसी को अचानक “दुश्मन” से “देशभक्त भाई” बताना किसी Political परिपक्वता या सीखने की इच्छा का संकेत नहीं है, बल्कि Pakistan के शासन तंत्र की कमजोरी और अवसरवाद को उजागर करता है.

रिपोर्ट में कहा गया कि जो Government अपने कब्जे वाले क्षेत्र की आबादी के साथ निरंतरता और बुनियादी सम्मान के साथ व्यवहार नहीं कर सकती, उसके पास दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने का कोई आधार नहीं है. पीओके में हुए प्रदर्शनों ने Pakistan के प्रचार तंत्र की वास्तविकता सामने ला दी है और यह दिखाया है कि सत्ता के समीकरण बदलते ही इस्लामाबाद अपनी भाषा भी बदल लेता है.

डीएससी