संयुक्त राष्ट्र ने तालिबान द्वारा महिला मंत्रालय खत्म करने को संधि का उल्लंघन बताया

जिनेवा . वैश्विक निगरानी की शीर्ष संस्था संयुक्त राष्ट्र की लैंगिक समानता इकाई ने अफगानिस्तान में सरकार के संस्थानों से महिला मंत्रालय को खत्म करने के तालिबान के फैसले की कड़ी आलोचना की है. संयुक्त राष्ट्र महिला की कार्यवाहक प्रमुख प्रमिला पैटन ने एक बयान में कहा, मैं सरकार के संस्थानों में महिला मंत्रालय को शामिल नहीं करने के स्पष्ट निर्णय से निराश हूं. ऐसे मंत्रालय दुनियाभर में पाए जाते हैं और महिलाओं के मानवाधिकारों के सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए सरकारों की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं. अब ऐसा मंत्रालय नहीं है, अफगानिस्तान और एक कदम पीछे हो गया है.
पैटन ने कहा, मैं तालिबान नेतृत्व से अंतर्राष्ट्रीय संधियों के तहत अपने कानूनी रूप से बाध्यकारी दायित्वों का पूरी तरह से पालन करने के अपने आह्वान की पुष्टि करती हूं. बयान में कहा गया है, ये स्पष्ट रूप से सभी नागरिकों के लिए समानता की गारंटी की मांग करते हैं, जिसमें राजनीतिक और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं की पूर्ण भागीदारी भी शामिल है. अंतर्राष्ट्रीय समुदाय स्पष्ट है और आगे भी रहेगा. सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में पूर्ण और सार्थक भागीदारी के अधिकार सहित महिलाओं के अधिकार, गैर-वैकल्पिक, गैर-परक्राम्य मानव अधिकार हैं. प्रमिला ने कहा, दुनिया की निगाह अफगानिस्तान पर टिकी हुई है. अगर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बढ़ते डर को दूर करना है और महिलाओं और लड़कियों का भविष्य सुनिश्चित करना है तो तालिबान अधिकारियों द्वारा महिलाओं के मानवाधिकारों के लिए मौजूदा निर्धारित पाठ्यक्रम को तुरंत बदलना चाहिए.

तालिबान नेताओं ने कहा है कि अफगानिस्तान में महिलाएं समाज में एक प्रमुख भूमिका निभाएंगी और शिक्षा तक उनकी पहुंच होगी. लेकिन वे सरकार बनाने को लेकर बातचीत में शामिल नहीं हुए हैं. हाल के हफ्तों में, तालिबान ने संकेत दिया है कि महिलाओं को घर पर रहना चाहिए, और कुछ मामलों में, आतंकवादियों ने महिलाओं को अपने कार्यस्थलों को छोड़ने का आदेश दिया है. मंगलवार (Tuesday) की घोषणा में महिलाओं के लिए मंत्रालय का कोई उल्लेख नहीं था और तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुहाजिद ने केवल इतना कहा कि तालिबान उस मुद्दे से निपटेगा.

प्रमिला पैटन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों (Protesters) के खिलाफ काबुल में अधिकारियों द्वारा बल प्रयोग पर ‘गंभीर चिंता’ जताई है. ज्यादातर महिलाएं अपने अधिकारों के समान आनंद की मांग कर रही थीं. प्रदर्शनकारियों (Protesters) पर तालिबान की कार्रवाई के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में जबीहुल्ला ने कहा कि अवैध प्रदर्शनों की अनुमति नहीं दी जाएगी.

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