
दिसपुर, 25 मई . असम Government ने Monday को राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किया. असम के संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने Chief Minister हिमंता बिस्वा सरमा की ओर से विधेयक पेश किया. विपक्षी विधायकों ने विधेयक का विरोध करते हुए अध्यक्ष से इसे पेश न करने का अनुरोध किया.
Chief Minister हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखा, “असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता 2026 विधेयक पेश होने से इस बात पर खुलकर चर्चा का मार्ग प्रशस्त हुआ है कि यूसीसी असम समय की आवश्यकता क्यों है और यह हमारे संस्थापकों द्वारा निर्धारित मार्ग को साकार करने में कैसे मदद करेगा?”
वहीं, मंत्री अतुल बोरा ने एक्स पर पोस्ट किया, “Chief Minister डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा की ओर से मैंने आज विधानसभा में असम समान नागरिक संहिता विधेयक- 2026 प्रस्तुत किया.”
असम मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह समान नागरिक संहिता के मसौदे को मंजूरी दी थी. सूत्रों के अनुसार, असम विधानसभा का कार्यकाल एक दिन बढ़ाकर 27 मई तक कर दिया गया है, जबकि विधेयक पर चर्चा Tuesday को होने की संभावना है. मंत्रिमंडल का यह निर्णय नव निर्वाचित असम विधानसभा के पहले सत्र से पहले आया है.
Government का कहना है कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए, चाहे उनका कोई भी धर्म हो, विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने से संबंधित व्यक्तिगत कानूनों का एक एकल, एकीकृत समूह लागू करना है. प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विवाह की कानूनी उम्र, बहुविवाह, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मुद्दों का समाधान करना है. इससे पहले Chief Minister ने स्पष्ट रूप से कहा था कि राज्य के पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों को भी प्रस्तावित कानून के प्रावधानों से छूट दी जाएगी.
असम, उत्तराखंड और Gujarat के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक पेश करने और पारित करने वाला तीसरा राज्य बनने जा रहा है. समान नागरिक संहिता India में नागरिकों के व्यक्तिगत कानूनों को तैयार करने और लागू करने का एक प्रस्ताव है, जो सभी नागरिकों पर, उनके धर्म की परवाह किए बिना, समान रूप से लागू होते हैं.
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25-28 भारतीय नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं और धार्मिक समूहों को अपने मामलों का प्रबंधन करने की अनुमति देते हैं, जबकि अनुच्छेद 44 भारतीय राज्य से अपेक्षा करता है कि राष्ट्रीय नीतियां बनाते समय वह सभी भारतीय नागरिकों पर निर्देशक सिद्धांतों और सामान्य कानून को समान रूप से लागू करे.
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ओपी/पीएम
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