अमेरिका में भारतीय मूल के दो व्यक्तियों पर वीजा धोखाधड़ी का आरोप – indias.news

न्यूयॉर्क, 13 फरवरी . अमेरिकी राज्य मैसाचुसेट्स में वीजा धोखाधड़ी के आरोप में बोस्टन में संघीय ग्रैंड जूरी ने भारतीय मूल के दो लोगों को दोषी ठहराया है.

न्यूयॉर्क के 36 वर्षीय रामभाई पटेल और 39 वर्षीय बलविंदर सिंह ने इस वारदात को अंजाम दिया.

मैसाचुसेट्स जिले के अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय के अनुसार, दोनों को पिछले सप्ताह वीजा धोखाधड़ी की साजिश रचने के एक-एक मामले में दोषी ठहराया गया था.

पटेल को 13 दिसंबर, 2023 को सिएटल में गिरफ्तार किया गया था और वाशिंगटन के पश्चिमी जिले में प्रारंभिक उपस्थिति के बाद, उन्हें मुकदमे तक हिरासत में रखने का आदेश दिया गया था.

सिंह को भी उसी दिन क्वींस में गिरफ्तार किया गया था और उनकी प्रारंभिक उपस्थिति न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले में हुई थी.

चार्जिंग दस्तावेज़ों के अनुसार, मार्च 2023 से शुरू होकर, पटेल और उनके सह-साजिशकर्ताओं, जिनमें कभी-कभी सिंह भी शामिल थे, ने वारदात को अंजाम दिया.

ये पूरे अमेरिका में आठ स्‍थानों/शराब दुकानों और फास्ट फूड रेस्तरां में किए गए, इनमें मैसाचुसेट्स में कम से कम चार शामिल थे.

आरोप लगाया गया है कि वारदात का उद्देश्य उपस्थित क्लर्कों को यह दावा करने की अनुमति देना था कि वे यू गैर-आव्रजन स्थिति (यू वीज़ा) के लिए एक आवेदन पर एक हिंसक अपराध के शिकार थे.

यू वीज़ा कुछ अपराधों के पीड़ितों के लिए उपलब्ध है, जिन्हें मानसिक या शारीरिक शोषण का सामना करना पड़ा है और जो आपराधिक गतिविधि की जांच या अभियोजन में कानून प्रवर्तन में सहायक रहे हैं.

वारदात के दौरान,”आरेपी रजिस्टर से नकदी लेने और भागने से पहले स्टोर के क्लर्कों /या मालिकों को बंदूक से धमकाते थे, लेकिन यह घटना वीडियो में कैद हो गई थी.

पीड़ितों पर आरोप है कि उन्होंने योजना में भाग लेने के लिए पटेल को भुगतान किया था. बदले में, पटेल ने कथित तौर पर अपराध के लिए स्टोर मालिकों को उनके स्टोर के उपयोग के लिए भुगतान किया.

एक कथित पीड़ित ने कथित तौर पर सशस्त्र वारदात में से एक में पीड़ित के रूप में भाग लेने के लिए 20 हजार डॉलर का भुगतान किया.

आरोप लगाया गया है कि कम से कम दो कथित पीड़ित सह-साजिशकर्ताओं ने सशस्त्र डकैतियों के शिकार होने के आधार पर यू वीज़ा आवेदन प्रस्तुत किए.

वीज़ा धोखाधड़ी की साजिश रचने के आरोप में पांच साल तक की जेल, तीन साल की निगरानी में रिहाई और 250,000 डॉलर के जुर्माने का प्रावधान है.

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