
तेल अवीव, 4 जुलाई . Pakistan ऐसी परिस्थिति में पहुंच सकता है, जहां इतिहास बताता है कि अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक अहमियत रखने वाले देशों की Governmentों पर अक्सर उनकी घरेलू शासन संबंधी नाकामियों के बावजूद बाहरी दबाव अपेक्षाकृत कम रहता है. हाल के समय में अमेरिका Pakistan को काफी करीब लेकर आया. ऐसे में एक रिपोर्ट में हवाला दिया गया है कि Pakistan को बढ़ावा देना अमेरिका को ही भारी पड़ सकता है.
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चाहे अमेरिका का Pakistan के प्रति नरम रुख हो या फिर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों के बावजूद यूरोपीय संघ से जीएसपी-प्लस का दर्जा जारी रखना, अंतरराष्ट्रीय साझेदार क्षेत्रीय रणनीतिक महत्व के कारण इस्लामाबाद की खुलकर आलोचना करने से बचते नजर आते हैं.
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यह रुझान जारी रहा, तो इसके गंभीर Political और सामाजिक परिणाम सामने आ सकते हैं. इसका असर Political विरोधियों, जातीय अल्पसंख्यकों और व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ने की आशंका है.
इटली के Political सलाहकार, लेखक और भू-Political विशेषज्ञ सर्जियो रेस्टेली ने ‘टाइम्स ऑफ इजरायल’ के लिए अपने लेख में कहा, “इतिहास अक्सर खुद को दोहराता है और दूरदृष्टि की कमी वाले नेता अपने पूर्ववर्तियों की गलतियों को दोहराते हैं. ट्रंप Government का Pakistan को प्रोत्साहन देना ऐसी ही एक भूल है, जिसकी भारी कीमत अमेरिका को चुकानी पड़ेगी.”
उन्होंने आगे लिखा, “1979 में अमेरिका और सऊदी अरब ने जनरल जिया-उल-हक के नेतृत्व वाले Pakistan का इस्तेमाल अफगानिस्तान में सोवियत संघ (यूएसएसआर) के खिलाफ एक प्रॉक्सी युद्ध शुरू करने के लिए रणनीतिक रूप से किया था. इसके बाद के दशकों में Pakistan ने दोनों पक्षों के साथ अपने हित साधे और इसी रणनीतिक गलती का अंतिम परिणाम 11 सितंबर 2001 का आतंकी हमला रहा.”
उन्होंने कहा, “आतंक के खिलाफ लड़ाई के दौरान Pakistan पर अमेरिका की लगातार निर्भरता ने न सिर्फ काबुल को तालिबान के हाथों में सौंप दिया, बल्कि अमेरिका को भी भारी कीमत चुकानी पड़ी.”
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने के बावजूद, Pakistan ने अफगान बॉर्डर पर सैन्य ऑपरेशन जारी रखा है, जिससे तालिबान अधिकारियों के साथ तनाव बढ़ गया. सीमा पार हमलों और हथियारों से होने वाली मुठभेड़ों की बढ़ती संख्या ने इस बात की चिंता बढ़ा दी है कि इस्लामाबाद अपने पड़ोस में डिप्लोमैटिक बातचीत को लेकर जबरदस्ती कर रहा है.
Pakistan के बिगड़ते घरेलू Political हालात के बीच, रेस्टेली ने कहा कि आलोचक तेजी से यह तर्क दे रहे हैं कि देश के अंदर की राजनीति पर सेना का प्रभाव एक ऐसे सिस्टम में बदल रहा है, जहां Political प्राधिकरण असल में Pakistanी आर्मी चीफ मुनीर के नेतृत्व वाली सेना के हाथों में है.
उन्होंने कहा, “Political कार्रवाई बलूचिस्तान में बढ़ती अशांति के साथ हुई है. अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने जाने-माने बलूच कार्यकर्ता महरंग बलूच समेत दूसरे कार्यकर्ताओं को सजा सुनाए जाने की कड़ी आलोचना की है. संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण Political असहमति को तेजी से आपराधिक बनाया जा रहा है. Pakistanी अधिकारी इन आरोपों को खारिज करते हैं और कहते हैं कि केस कानून के मुताबिक चलाए जाते हैं. फिर भी, यह सोच कि Political विरोध और जातीय शिकायतों को मुख्य रूप से दबाव डालकर सुलझाया जा रहा है, इससे बलूच समुदायों के और अलग-थलग पड़ने का खतरा है.”
रेस्टेली ने चेतावनी देते हुए कहा कि विदेश में Pakistan की कूटनीतिक हालात देश में लोकतांत्रिक गिरावट के लिए पॉलिटिकल कवर दे सकती है और दक्षिण एशिया में एक नई तानाशाही की ओर बढ़ने को बढ़ावा दे सकती है.
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एबीएम
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