आर्थिक बदहाली का सामना कर रहा तीन स्वर्ण पदक विजेता पैरालंपिक खिलाड़ी

लखनऊ (Lucknow) . पैरालंपिक-1981 में भारत के लिए तीन स्वर्ण पदक जीतने वाले कौशलेंद्र सिंह आज बदहाली का जीवन जीने के लिए मजबूर हैं. इस स्वर्ण विजेता खिलाड़ी को इलाज तक नहीं मिल पा रहा.

कौशलेंद्र उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के शाहजहांपुर (Shahjahanpur) जिले के जलालाबाद के रहने वाले हैं. उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक-1981 में तीन स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम दुनिया में रोशन किया था. कौशलेंद्र ने उस समय टोक्यो पैरालंपिक में 1500 मीटर और 100 मीटर व्हीलचेयर रेस में स्वर्ण पदक के साथ 100 मीटर की बाधा दौड़ में भी पदक जीता था. इस दौरान कौशलेंद्र ने अन्तरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कई रजत और कांस्य पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया पर इस वक्त 55 वर्ष के कौशलेंद्र सिंह किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं, उनकी आर्थिक स्थित भी खराब है. किडनी के इलाज के लिए कौशलेंद्र हरिद्वार (Haridwar) स्थित रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम पहुचे जहां से उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल नई दिल्ली (New Delhi) रेफर कर दिया गया. आरएमएल में उन्हें भर्ती तो कर लिया गया पर दो दिन बाद कुछ और जांच कराकर आने की बात कहकर बिना किसी इलाज के डिस्चार्ज कर दिया गया.

टोक्यो पैरालंपिक-1981 के गोल्ड मेडलिस्ट कौशलेंद्र सिंह भावुक होकर कहते है कि आज टोक्यो पैरालंपिक-2020 में शानदार प्रर्दशन कर देश का नाम रोशन करनेवाले अपने खिलाड़ियों पर बेहद गर्व हो रहा है क्योंकि टोक्यो पैरालंपिक-1981 में देश के लिए स्वर्ण पदक पर मेरा भी इसी तरह से स्वागत-सम्मान हुआ था. तब सरकार ने भविष्य में भी हमलोगों की पूरी मदद करने का आश्वासन दिया था पर उसके बाद सरकारों, नेताओं और अधिकारियों से सिर्फ आश्वासन मिला, कोई मदद आज तक नहीं मिली. हालांकि मुझे इसके लिए किसी से कोई शिकायत नहीं है.

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