
Patna, 23 जुलाई . जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने नीट पेपर लीक, छात्रों के विरोध-प्रदर्शन, वक्फ संपत्तियों से जुड़े ‘उम्मीद’ पोर्टल और Prime Minister Narendra Modi से एनसीपी प्रमुख शरद पवार व सांसद सुप्रिया सुले की मुलाकात समेत कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर गंभीर विमर्श होना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए.
नीट पेपर लीक मामले पर नीरज कुमार ने कहा कि Government यह स्वीकार कर चुकी है कि इस मामले में गलती हुई है. देश के छात्र, उनके अभिभावक और आम जनता की अपेक्षा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए. उन्होंने Prime Minister Narendra Modi द्वारा फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की बात का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पर भरोसा किया जाना चाहिए. इस पूरे मुद्दे पर संसद में व्यापक बहस होनी चाहिए और विपक्ष को चर्चा से बचने के बजाय अपने सुझाव रखने चाहिए. केवल आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार, कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने और पूर्व में विभिन्न राज्यों में हुए प्रश्नपत्र लीक मामलों की भी समीक्षा होनी चाहिए.
कांग्रेस Governmentों के दौरान हुए कथित प्रश्नपत्र लीक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई थी. यह Political नहीं बल्कि छात्र हित का विषय है और Government अपना एक्शन प्लान प्रस्तुत करेगी, इसलिए छात्रों के कंधों पर बंदूक रखकर राजनीति का एजेंडा तय नहीं किया जाना चाहिए.
छात्र आंदोलनों के Politicalरण के सवाल पर जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि किसी भी आंदोलन का Political स्वरूप लेना स्वाभाविक है, क्योंकि विपक्ष को एक बड़ा मुद्दा मिला है. हालांकि, उन्होंने विपक्ष से यह भी अपेक्षा जताई कि वह अपने शासनकाल की कमियों और गलतियों को भी स्वीकार करे. सबसे महत्वपूर्ण बात छात्रों और उनके अभिभावकों की भावनाओं का सम्मान करना है और बच्चों के भविष्य के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए.
प्रदर्शन को लेकर Actor सलमान खान के हालिया बयान पर नीरज कुमार ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक और विपक्षी दल को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और Political लाभ लेने का अधिकार है. लेकिन, यदि किसी संवेदनशील मुद्दे को अत्यधिक भावनात्मक बनाकर छात्रों को हिंसक रास्ते की ओर उकसाया जाता है, तो यह राजनीति का गंभीर अपराध है. Political दलों का शायद कुछ नुकसान न हो, लेकिन हिंसा की राह पर जाने वाले छात्र का पूरा करियर बर्बाद हो सकता है.
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज मामले में Supreme Court द्वारा तत्काल सुनवाई से इनकार किए जाने पर उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना Government और प्रशासन की जिम्मेदारी है. न्यायपालिका की अपनी सीमित भूमिका होती है और यदि Police अपना दायित्व निभा रही है, तो हर मामले में न्यायपालिका से हस्तक्षेप की अपेक्षा उचित नहीं है. सर्वोच्च न्यायालय विधायिका और कार्यपालिका दोनों का सम्मान करता है और लोकतंत्र लोक-लाज तथा संवैधानिक मर्यादाओं से चलता है.
Prime Minister Narendra Modi से संसद परिसर में एनसीपी प्रमुख शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले की मुलाकात पर नीरज कुमार ने कहा कि इस मुलाकात के Political मायने क्या हैं, यह कहना उनके लिए संभव नहीं है. उन्होंने उम्मीद जताई कि देशहित, संसद की गरिमा, संसद की कार्यवाही में बार-बार आने वाली बाधाओं, Maharashtra के Political हालात और सार्वजनिक जीवन में बढ़ रही भाषाई कटुता जैसे विषयों पर चर्चा हुई होगी.
वक्फ संपत्तियों और अल्पसंख्यकों के हित से जुड़े ‘उम्मीद’ पोर्टल पर जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने अभी उस पोर्टल का विस्तार से अध्ययन नहीं किया है, इसलिए उसके स्वरूप पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा. यदि यह पोर्टल अल्पसंख्यकों के कल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन या वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से बनाया गया है, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए. केवल वक्फ ही नहीं, बल्कि मठ-मंदिर और अन्य धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों के दुरुपयोग की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं. ऐसे में यदि किसी पारदर्शी व्यवस्था और पोर्टल के माध्यम से इन संपत्तियों के प्रबंधन को बेहतर बनाया जाता है, तो यह अल्पसंख्यकों सहित समाज के व्यापक हित में होगा.
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