चंद्रमा के भूगर्भीय इतिहास की जानकारी में हो सकता बड़ा बदलाव

बीजिंग . पडोसी देश चीन द्वारा चंद्रमा से लाए गए चट्टानों के नमूने के बारे में शोधकर्ता ने बताया कि इन नमूनों से पुरातन चंद्रमा की ज्वालामुखी गतिविधियों की जानकारी मिलती है.इस विश्लेषण से चंद्रमा के भूगर्भीय इतिहास की जानकारी में बड़ा बदलाव हो सकता है. चीनी शोधकर्ता ली जियानहुआ का कहना है कि नमूनों के विश्लेषण ने चंद्रमा की रासायनिक संरचना और उसके विकास पर ऊष्मा के प्रभाव की नई जानकारी का खुलासा किया है.ली ने बताया कि नमूनों का विश्लेषण बताता है कि चंद्रमा पर हालिया ज्वालामुखी गतिविधि 2 अरब साल पहले तक होती रही थी, जबकि इससे पहले माना जाता रहा है कि ऐसे गतिविधियां 2.8 से 3 अरब साल पहले तक बंद हो गई थी.ज्वालामुखी गतिविधियां चंद्रमा के लिए बहुत ज्यादा महत्व रखती हैं.उनसे चंद्रमा का अंदर के बारे में जानकारी तो मिलती ही है, साथ ही वे आंदरूनी ऊर्जा और पदार्थ चक्र को प्रदर्शित करती हैं.” ली ने रिपोर्टरों को जानाकरी दी.अभी तक वैज्ञानिक लावा का इतने आधुनिक समय तक गर्म रहने के अन्य संभावित कारणों की भी पड़ताल कर रहे थे.गौरतलब है कि जो नमूने अपोलो अभियान के द्वारा पृथ्वी पर लाए गए थे उनके अध्ययन से पता चला था कि वे 3 से 2.8 अरब साल पुरानी ज्वालामुखी गतिविधि से बने थे.जबकि चीनी नमूनों का समय केवल 2 अरब साल पुराना बताया जा रहा है.इसका मतलब है कि केवल नमूनों के आधार ही चंद्रमा की भूगर्भीय गतिविधियों के समय को सुनिश्चित नहीं किया जा सकता.

चीन से पहले साल 1970 के दशक में सोवियत संघ और अमेरिका के चंद्रमा अभियानों से चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाने का काम किया था.इसके बाद अब चीन ने यह सक्रियता दिखाई है.लेकिन चीन अब इससे भी आगे जाने का इरादा कर चुका है.अब वह रोबोटिक अभियान को आगे बढ़ाते हुए चंद्रमा के पीछे वाले हिस्से नमूने लाएगा.ज्वालामुखी गतिविधि के अलावा कई वैज्ञानिक इस बात की पड़ताल करने पर जोर देने की जरूरत पर बल दे रहे थे कि चंद्रमा को ऊष्मा ज्वालामुखी के अलावा भी किसी और गतिविधि से मिल सकती है.इसमें चंद्रमा के अंदर के रेडियोधर्मी गतिविधिया या फिर इसमें टाइडल क्रियाओं से पैदा हुई ऊष्मा का प्रभाव भी हो सकता है.यानि जिस तरह के चंद्रमा के गुरुत्व का प्रभाव पृथ्वी पर पड़ता है, उसी तरह पृथ्वी का गुरुत्व भी चंद्रमा को प्रभावित करता है.वैज्ञानिकों को अब चंद्रमा की दूसरी जगहों के नमूनों आने का इंतजार है.नासा तीन साल बाद चंद्रमा पर दो लोगों को भेजेगा.इसके अलावा चीन के चंद्रमा के पीछे जाने वाले अभियान से भी बहुत उम्मीदें हैं.इस बार नमूने एटकेन बेसिन से लाए जाएंगे जिसके बारे में माना जाता है कि वह 4 अरब साल पहले बना था.

जाहिर है चीन अंतरिक्ष अन्वेषण में जिस तेजी से बढ़ रहा है, वह उसे शीर्ष अंतरिक्ष शक्तियों में विशेष स्थान दिलाने में सक्षम है.उसका भी खुद इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को शुरु करने के लिए उसके अंतरिक्ष यात्री स्टेशन पर ही काम कर रहे हैं.उसका एक रोवर चंद्रमा के पिछले हिस्से पर काम कर रहा है तो जुरोंग रोवर मंगल पर सक्रिय है. बता दें ‎कि पिछले दिनों चीन का यह ‎‎मिशन खासी चर्चा में रहा. ये नमूने वैसे तो पिछले साल के अंत में चीनी रोबोट अंतरिक्ष यान द्वारा धरती पर उतारे गए थे. इन पर हुए विश्लेषणों ने बिलकुल नई जानाकरी दी है.

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