देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन

New Delhi, 23 मई . इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने Saturday को कहा कि देश में पेट्रोल और डीजल की ओवरऑल कोई कमी नहीं है. कुछ पेट्रोल पंपों पर सप्लाई में जो दिक्कतें सामने आई हैं, वे ‘स्थानीय और अस्थायी’ हैं.

आईओसी ने एक बयान में कहा कि यह छोटी-छोटी दिक्कतें कुछ क्षेत्रों में मांग और आपूर्ति के असंतुलन तथा बिक्री के बदलते पैटर्न की वजह से हुई हैं. कंपनी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और इन अलग-अलग समस्याओं को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है, ताकि ग्राहकों को बिना रुकावट ईंधन मिलता रहे.

बयान में कहा गया, “हम ग्राहकों और आम जनता को आश्वस्त करना चाहते हैं कि देश में पेट्रोल और डीजल की ओवरऑल कोई कुल कमी नहीं है. कुछ रिटेल आउटलेट्स पर जो स्थिति दिखाई दे रही है, वह पूरी तरह स्थानीय और अस्थायी है. यह कुछ इलाकों में मांग-आपूर्ति के असंतुलन और बिक्री के बदले हुए पैटर्न के कारण हुई है.”

आईओसी के अनुसार, कुछ पेट्रोल पंपों पर मांग बढ़ने की वजह डीजल की मौसमी मांग में बढ़ोतरी रही, जो फसल कटाई के मौसम के दौरान देखी गई. इसके अलावा, निजी पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कीमतें अपेक्षाकृत ज्यादा होने के कारण ग्राहक सरकारी पंपों की ओर शिफ्ट हुए. सार्वजनिक क्षेत्र के पंपों पर संस्थागत खरीद भी बढ़ी है.

कंपनी ने कहा कि उसके 42,000 से ज्यादा पेट्रोल पंपों के नेटवर्क में केवल बहुत कम संख्या में आउटलेट्स पर सप्लाई बाधित हुई है, जबकि अधिकांश पंपों पर स्टॉक और आपूर्ति सामान्य और पर्याप्त बनी हुई है.

सरकारी तेल विपणन कंपनियां देश भर में पर्याप्त ईंधन भंडार बनाए हुए हैं और अलग-अलग जगहों पर आई बाधाओं को दूर करने के लिए लगातार कदम उठा रही हैं, ताकि सप्लाई बिना रुकावट जारी रहे.

आईओसी ने कहा, “मांग में लगातार और असाधारण वृद्धि के बावजूद इंडियन ऑयल देश भर में ग्राहकों की जरूरतों को लगातार पूरा कर रहा है.”

इससे पहले Saturday को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी की गई. पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बार है जब खुदरा ईंधन दरों में बदलाव किया गया है.

सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की. यह बढ़ोतरी वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी भू-Political तनाव के कारण की गई है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है.

डीबीपी