प्लास्टिक कचरे से निपटने की जिम्मेदारी निजी कंपनियों पर भी

नई दिल्ली (New Delhi) . प्लास्टिक निर्माता को अब सरकार को बताना होगा कि वे साल भर में कितने प्लास्टिक का उत्पादन करेंगे और फिर इसे रिसाइकिल करने की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर होगी. भारत में प्लास्टिक कचरे पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से काफी प्रयास किए जा रहे हैं. जुलाई 2022 से प्लास्टिक के चम्मच-कांटे, प्लास्टिक स्टिक वाले इयरबड और आईसक्रीम की प्लास्टिक डंडियां भी बैन करने के फैसले के बाद अब प्लास्टिक के उत्पादकों पर भी जिम्मेदारी डालने की तैयारी है. इसके लिए पर्यावरण मंत्रालय की ओर से ड्राफ्ट नियम जारी किए गए हैं. इन नियमों के जरिए प्लास्टिक पैकेजिंग उत्पाद बनाने वालों के लिए 2024 तक अपने कुल उत्पादन को इकट्ठा कर उसके कम से कम एक हिस्से को रिसाइकिल कर उसका बाद में इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है. प्लास्टिक का हर संभव इस्तेमाल इसमें एक सिस्टम का निर्धारण भी किया गया है, जहां से प्लास्टिक पैकेजिंग के उत्पादक और प्रयोगकर्ता सर्टिफिकेट ले सकते हैं. इस सिस्टम को एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी नाम दिया गया है. सरकारी नोटिफिकेशन में बताए गए इन नियमों के छह दिसंबर से लागू होने की उम्मीद है. अभी इन पर जनता की प्रतिक्रिया ली जा रही है. प्लास्टिक की देवी इसमें प्लास्टिक को हर तरह से इस्तेमाल में लाए जाने की योजना है. प्लास्टिक का केवल एक हिस्सा, जिसे रिसाइकिल नहीं किया जा सकता, जैसे कई परतों वाली कई तत्वों से बनी प्लास्टिक, उसका इस्तेमाल सड़क बनाने, कचरे से ऊर्जा, कचरे से तेल और सीमेंट आदि में इस्तेमाल किया जाएगा. इस तरह का निस्तारण भी सिर्फ उन्हीं तरीकों से किया जा सकेगा, जिसकी केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की ओर से अनुमति दी गई हो.

अपने प्लास्टिक उत्पादन को वापस जुटाना होगा 6 अक्टूबर को सार्वजनिक किए गए नियमों के मुताबिक प्लास्टिक पैकेजिंग की तीन कैटेगरी हैं. पहली है, ‘कठोर’ प्लास्टिक. दूसरी कैटेगरी की प्लास्टिक है, सिंगल या मल्टीलेयर (अलग-अलग तरह की प्लास्टिक की एक से ज्यादा परतों वाली) प्लास्टिक, जैसे- प्लास्टिक सीट या इससे बने कवर, कैरी बैग (कम्पोस्टेबल प्लास्टिक से बने बैग भी शामिल), प्लास्टिक सैशे या पाउच आदि. इसके अलावा तीसरी कैटेगरी को मल्टीलेयर्ड प्लास्टिक पैकेजिंग कहा जाता है, जिसमें कम से कम एक लेयर प्लास्टिक की होती है और कम से कम एक लेयर प्लास्टिक से इतर किसी और पदार्थ की होती है. प्लास्टिक निर्माता सरकार को एक केंद्रीय वेबसाइट के माध्यम से यह बताने को बाध्य होंगे कि वे सालाना कितने प्लास्टिक का उत्पादन कर रहे हैं. कंपनियों के लिए 2021-22 में कुल उत्पादन के कम से कम 35 फीसदी प्लास्टिक को जुटाना जरूरी होगा.

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