जोड़तोड़ की राजनीति बंद होनी चाहिए, पार्टी उसी के पास रहनी चाहिए जिसने बनाई : आनंद दुबे

Mumbai , 23 जून . शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े हालिया Political घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए देश में बढ़ते दलबदल और Political जोड़-तोड़ की राजनीति पर चिंता व्यक्त की.

उन्होंने से बातचीत में कहा कि टीएमसी की स्थापना ममता बनर्जी ने की थी और पार्टी के भविष्य में नेतृत्व किसके हाथों में होगा, यह समय तय करेगा, हालांकि उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि लोकतंत्र में यह परंपरा नहीं बननी चाहिए कि कोई व्यक्ति अथवा नेता पार्टी खड़ी करे और बाद में कोई दूसरा समूह उस पर कब्जा कर ले.

आनंद दुबे ने कहा कि देश में Political दलों को तोड़ने और नेताओं को अपने पक्ष में करने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने किसी Political दल की नींव रखी है, पार्टी पर उसका नैतिक और Political अधिकार होना चाहिए. जब ताकतवर लोग एकजुट हो जाते हैं तो वे किसी भी सीमा तक जा सकते हैं. उन्होंने ऐसी राजनीति को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया.

Maharashtra की राजनीति में चर्चा का विषय बने ‘ऑपरेशन टाइगर’ पर भी आनंद दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि ऑपरेशन करना डॉक्टरों का काम होता है, लेकिन अब Political दलों के नेता भी ऑपरेशन करने लगे हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी को लगातार कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है. दुबे ने कहा कि पहले शिवसेना के 18 सांसद थे, जिनमें विभाजन कर एक अलग गुट को नया नाम और नया चुनाव चिह्न प्रदान किया गया. इसके बाद जो सांसद लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से जनता द्वारा चुनकर आए थे, उनकी Political स्थिति भी प्रभावित हुई.

उन्होंने दावा किया कि पार्टी को लगातार तोड़ने की कोशिशों के कारण संगठन की ताकत कम हुई है. दुबे ने कहा कि अब ऐसी चर्चाएं सुनने को मिल रही हैं कि आगे विधायकों और नगरसेवकों को भी अपने पक्ष में करने के प्रयास किए जा सकते हैं.

उन्होंने कहा कि पूरा घटनाक्रम एकतरफा दिखाई देता है, जिसमें सत्ता और प्रभाव का इस्तेमाल अधिक नजर आता है.

राम मंदिर में दान चोरी के मामले पर भी शिवसेना (यूबीटी) नेता ने मंदिर प्रशासन पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर ट्रस्ट मंदिर की समस्त व्यवस्थाओं और वित्तीय गतिविधियों की निगरानी करता है. ऐसे में यदि मंदिर परिसर में चोरी या वित्तीय अनियमितता की घटनाएं सामने आती हैं तो उसकी जिम्मेदारी भी ट्रस्ट की बनती है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में ट्रस्ट से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों चंपत राय और नृपेंद्र मिश्रा की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई है.

दुबे ने कहा कि देशभर से आने वाले श्रद्धालु अपनी मेहनत की कमाई का धन भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण और उसके सुचारू संचालन के लिए दान करते हैं. यदि उस चढ़ावे या दान राशि का कोई गबन करता है तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ धोखा और देशहित के विरुद्ध कार्य माना जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) कार्य कर रहा है, लेकिन लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच कितनी निष्पक्ष और प्रभावी होती है. उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसी राज्य Government के अधीन है और अयोध्या भी Government के विशेष फोकस वाले क्षेत्रों में शामिल है, इसलिए पूरे मामले पर सभी की नजर बनी हुई है.

एएसएच/