हिन्दू समाज का संगठन ही भारत की शक्ति, चरित्रवान नागरिकों से बनेगा वैभवशाली राष्ट्र: रामदत्त चक्रधर

Lucknow, 10 जून . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह Government्यवाह रामदत्त चक्रधर ने कहा कि संघ का मूल ध्येय चरित्रवान, संगठित और राष्ट्रनिष्ठ हिन्दू समाज का निर्माण कर India को वैभवशाली राष्ट्र बनाना है. उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज जितना संगठित और सशक्त होगा, राष्ट्र भी उतना ही मजबूत होगा. संघ ने पिछले सौ वर्षों में समाज में आत्मबोध, राष्ट्रीय चेतना और संगठन शक्ति के जागरण का कार्य किया है.

Lucknow के सरस्वती कुंज, निराला नगर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग-प्रथम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए चक्रधर ने कहा कि वर्ष 2026 कई ऐतिहासिक अवसरों का संगम है. यह वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, गुरु तेग बहादुर की शहादत की 350वीं वर्षगांठ, ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के रूप में विशेष महत्व रखता है. उन्होंने कहा कि वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने जिस विचार के साथ संघ की स्थापना की थी, आज वह एक विशाल सामाजिक शक्ति के रूप में विकसित हो चुका है.

देशभर में संघ की 83 हजार से अधिक शाखाएं संचालित हो रही हैं और प्रतिवर्ष 15 से 20 हजार कार्यकर्ताओं को विभिन्न प्रशिक्षण वर्गों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता है. चक्रधर ने कहा कि डॉ. हेडगेवार का मानना था कि समाज में बढ़ती आत्मकेंद्रित प्रवृत्ति को समाप्त कर व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित बनाना आवश्यक है. इसी उद्देश्य से दैनिक शाखा की कार्यपद्धति विकसित की गई, जो चरित्र निर्माण, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का संस्कार देती है.

उन्होंने संघ के सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश विभाजन, चीन युद्ध, आपातकाल और कोरोना महामारी जैसे कठिन कालखंडों में स्वयंसेवकों ने समाज और राष्ट्र के लिए समर्पण का परिचय दिया. उन्होंने कहा कि संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक वैचारिक प्रवाह है, जो राष्ट्र जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बना हुआ है.

सह Government्यवाह ने कहा कि India की पहचान उसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ी हुई है. देश की संस्थाओं के आदर्श वाक्य भारतीय ज्ञान परंपरा से लिए गए हैं, जो भारतीय संस्कृति की गहराई और व्यापकता को दर्शाते हैं. उन्होंने कहा कि India के विकास का आधार केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि सद्गुणों और नैतिक मूल्यों का संवर्धन भी है. परिवार व्यवस्था, सामाजिक समरसता और जातिगत भेदभाव के विषय में उन्होंने कहा कि छुआछूत जैसी कुरीतियां समाज को कमजोर करती हैं. संघ की कार्यपद्धति समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का कार्य करती है.

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी भी संघ शिविरों में जाति-भेद से ऊपर उठकर एकात्मता के वातावरण से प्रभावित हुए थे. पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए चक्रधर ने कहा कि भारतीय जीवन मूल्यों में प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना निहित है. वर्तमान समय में पर्यावरण संतुलन बनाए रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. समारोह के मुख्य अतिथि एवं प्रगतिशील किसान पद्मश्री रामसरन वर्मा ने कहा कि यह केवल एक प्रशिक्षण वर्ग का समापन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में नई आहुति का आरंभ है.

उन्होंने प्रशिक्षित स्वयंसेवकों से समाज में एकता, समरसता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने का आह्वान किया. कार्यकर्ता विकास वर्ग-प्रथम में पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के अवध, Kanpur, काशी और गोरखपुर प्रांतों से आए 289 स्वयंसेवकों ने 20 दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त किया. प्रशिक्षण के दौरान स्वयंसेवकों को शारीरिक, बौद्धिक, सेवा, संगठन, संपर्क, प्रचार और नेतृत्व विकास से जुड़े विभिन्न विषयों का प्रशिक्षण दिया गया.

विकेटी/एमएस