
New Delhi, 23 जून . कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने Tuesday को बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए आंतरिक रणनीति पर सवाल उठा दिए. उन्होंने कहा कि बिहार कांग्रेस अध्यक्ष पद से उन्हें हटाए जाने के बाद पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा.
अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा, “मैं उस समय बिहार का अध्यक्ष था. शाहनवाज आलम एआईसीसी सेक्रेटरी बन गए और उन्होंने सबसे पहला काम मुझे पद से हटाने का किया. उसके बाद जो नतीजे आए, वे खुद सब कुछ बयां करते हैं. अगर मैं उस पद पर बना रहता, तो कांग्रेस सिर्फ पांच-छह सीटों तक सीमित नहीं रहती.”
सांसद ने खुद को ‘सियासी अखाड़े का आदमी’ बताते हुए जोड़ा, “मैं बिहार को अच्छी तरह समझता हूं. सलमान साहब मुझे अच्छी तरह जानते हैं. हम उनके अखाड़े के व्यक्ति हैं. हम बिहार, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों को समझते हैं. लेकिन, जिन लोगों का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, उन्हें बिहार का प्रभारी बना दिया जाता है.”
अखिलेश प्रसाद सिंह ने अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को लेकर भी कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “केरल में आप नहीं रोक सकते थे. इसीलिए वहां अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को प्रतिनिधित्व मिल सका. हम नहीं सोच सकते थे कि असम में अल्पसंख्यक 30 सीटों से कम में सिमट सकते हैं. लेकिन, वहां परिसीमन करके ऐसी स्थिति लाई गई, जिसमें 18-20 तक उन्हें सीमित कर दिया गया. वो भी 18 कौन हैं, जो कांग्रेस के हैं. अगर 20 विधायक जीते हैं, तो उसमें 18 साथी कांग्रेस से जीतकर आए हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “एक नैरेटिव तैयार किया जा रहा है कि कांग्रेस अल्पसंख्यकों की पार्टी है. हिंदुओं से इनका लेना-देना नहीं है. जो सीट पश्चिम बंगाल में अगर कोई जीता है, तो अल्पसंख्यक बिरादरी के लोग जीते हैं. इसका मतलब कांग्रेस अल्पसंख्यक बिरादरी का प्रतिनिधित्व करती है. पूरे हिंदुस्तान में ऐसी नैरेटिव बनाने की कोशिश हो रही है.”
सांसद ने कहा कि गैर-Political लोगों को महत्वपूर्ण राज्यों का प्रभारी बनाए जाने से पार्टी को नुकसान हो रहा है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर सही लोगों को जिम्मेदारी दी जाती, तो बिहार में कांग्रेस का प्रदर्शन कहीं बेहतर होता.
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एससीएच/एबीएम
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