तालिबानी हिंसा, आर्थिक तंगी से लोगों की मानसिक सेहत बिगड़ी

काबुल . अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तालिबान को अफगानिस्तान पर कब्जा किए एक महीने से अधिक समय हो गया है. तालिबान के हाथों में सत्ता आने के बाद देश में संकट गहराता जा रहा है. तालिबानी हिंसा, कड़े प्रतिबंधों व आर्थिक तंगी का असर अब लोगों की मानसिक सेहत पर भी दिखने लगा है. हिंसा, भुखमरी व बेरोजगारी से परेशान लोग पागल हो रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक तंगी के कारण अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में मानसिक स्वास्थ्य के मामले बढ़ गए हैं. अधिकारियों ने चिंता व्यक्त की है कि मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों से पीड़ित अधिकांश रोगी डॉक्टरों (Doctors) के पास नहीं गए और इस समस्या से पीड़ित रहे. रविवार (Sunday) को अंतर्राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए नंगरहार जोनल अस्पताल के मनोवैज्ञानिक विभाग के प्रमुख डॉ अहमद जहीरयार ने कहा कि प्रांत में मानसिक बीमारियों की संख्या बढ़ी है और ज्यादातर महिलाएं मनोवैज्ञानिक समस्याओं से पीड़ित हैं क्योंकि उन्हें सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

डॉ. जहीरयार ने कहा कि आर्थिक तंगी या सांस्कृतिक प्रतिबंधों के कारण इन रोगियों ने चिकित्सकों से जांच कराने से परहेज किया. इस बीच, नंगरहार स्वास्थ्य विभाग के निदेशक अब्दुल रहमान फतेह ने कहा कि उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए यह दिन मनाया. उन्होंने कहा कि मानसिक रोगियों के इलाज की सुविधा जोनल अस्पताल के साथ-साथ जिला अस्पतालों में भी उपलब्ध कराई गई है. मानसिक स्वास्थ्य के रोगी समीउल्लाह ने पझवोक अफगान न्यूज को बताया, “मैं इलाज के लिए जिला अस्पताल गया था, लेकिन कोई दवा नहीं थी, फिर मैं जोनल अस्पताल आया, वहां कोई दवा भी नहीं थी और मुझे यहां बिना दवाओं के अस्पताल में भर्ती होना पड़ा.”

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