
New Delhi, 19 जुलाई . 20 जुलाई 1921 को जन्मे सामता प्रसाद भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास के महानतम तबला वादकों में गिने जाते हैं. वे बनारस घराने के सबसे प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों में थे. उनकी वादन शैली में शक्ति, स्पष्टता, लय की गहराई और अद्भुत सौंदर्य का अनूठा संगम देखने को मिलता था. उन्होंने India ही नहीं, बल्कि विश्वभर में तबला वादन की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. झनक झनक पायल बाजे जैसे कई गीतों को अपने तबला वादन से प्रख्यात बना दिया.
पंडित समता प्रसाद का जन्म कबीर चौरा (वाराणसी) में बनारस घराने की तबला और पखावज की परंपरा में डूबे एक परिवार में हुआ था, जिसे कभी-कभी पूरब बाज स्कूल भी कहा जाता है. पिता हरि सुंदर्र थे, जिन्हें बच्चा मिश्रा के नाम से भी जाना जाता था.
समता प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा उनके पिता के साथ शुरू हुई. हालांकि, जब समता प्रसाद मात्र सात वर्ष के थे, तभी उनके पिता की मौत हो गई. इसके बाद, वह भिक्कू महाराज के शिष्य बने और प्रतिदिन लंबे समय तक अभ्यास करने लगे.
पं. समता प्रसाद ने 1942 में ‘इलाहाबाद संगीत सम्मेलन’ में अपना पहला बड़ा प्रदर्शन दिया था. इस दौरान उन्होंने सम्मेलन में मौजूद संगीतकारों को प्रभावित किया और जल्द ही एक संगीतकार के साथ-साथ एक एकल कलाकार के रूप में भी खुद को स्थापित कर लिया.
समता प्रसाद ने कोलकाता, Mumbai , चेन्नई और Lucknow में प्रदर्शन किया. उन्होंने विदेशों में भी भारतीय सांस्कृतिक टीम का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें फ्रांस, रूस और एडिनबर्ग शामिल हैं. समता प्रसाद ने फिल्मी गीतों के लिए भी तबला बजाया. झनक झनक पायल बाजे, मेरी सूरत तेरी आंखें, बसंत बहार, असमानता और शोले जैसी हिंदी फिल्मों में तबला बजाया.
पंडित समता प्रसाद को 1979 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो India की राष्ट्रीय संगीत, नृत्य और नाटक अकादमी, संगीत नाटक अकादमी द्वारा दिया जाता है. वहीं, 1991 में India Government द्वारा दिया जाने वाला तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. पंडित समता प्रसाद की 31 मई, 1994 को पुणे में दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई. वे नाद रूप द्वारा आयोजित एक कोचिंग कार्यशाला आयोजित करने के लिए पुणे आए थे.
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ओपी/डीकेपी
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