‘सरकार को समाधान खोजना था, वे अस्पताल लेकर चले गए’, सोनम वांगचुक पर बोले कांग्रेस नेता हुसैन दलवई

Mumbai , 18 जुलाई . राष्ट्रीय राजधानी जंतर-मंतर पर कई दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को दिल्ली Police और डॉक्टरों की निगरानी में सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया. विपक्ष ने इस पूरे घटना को लेकर केंद्र Government पर तीखा हमला बोला है. Maharashtra से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने कहा कि Government को समाधान खोजना चाहिए था. लेकिन, Government तो उन्हें अस्पताल लेकर चली गई.

Mumbai में से बातचीत में कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि सोनम वांगचुक इतने दिनों से विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे. मुझे जो जानकारी है, वह यह है कि वे 20 दिन से अनशन पर थे. मेरी नजर में, समाधान खोजने की कोशिश करने के बजाय Government उन्हें अस्पताल ले गई. मुझे लगता है कि यह गलत है. नीट में इतने बड़े घोटाले के बावजूद, Government ने न तो इस पर कोई बात की है और न ही कोई कार्रवाई की है.

उन्होंने आगे कहा कि मेरी राय में, शिक्षा मंत्री को पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था. अतीत में जब भी ऐसे घोटाले हुए हैं, संबंधित विभाग के प्रभारी मंत्री ने इस्तीफा दिया है. लेकिन, हम लोगों ने देखा कि नीट पेपर लीक होने के बाद भी शिक्षा मंत्री ने जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं दिया. पहले की कांग्रेस Governmentों में मंत्री जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देते थे.

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के ‘राम रक्षा आंदोलन’ पर भाजपा नेताओं के बयान पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने पलटवार किया.

उन्होंने कहा कि भाजपा तरह-तरह की बातें कर रही है. क्या भगवान राम सिर्फ उन्हीं के देवता हैं. यहां तक कि जगद्गुरु शंकराचार्य ने भी कहा है कि वे राम मंदिर में नहीं जाएंगे, क्योंकि वह अब मंदिर नहीं रहा, बल्कि भाजपा और आरएसएस का दफ्तर बन गया है. लोगों ने इतनी श्रद्धा से जो चढ़ावा चढ़ाया था, उसमें चोरी कैसे हुई, इस पर भी सवाल उठे हैं. एक गरीब आदमी भी अपनी मेहनत की कमाई से दान देता है, फिर भी वहां चोरी हो गई. भाजपा ने इस देश की राजनीति को खराब कर दिया है.

एनसीपी(एसपी) विधायक जयंत पाटिल और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बीच हुई मुलाकात पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि मुझे नहीं लगता है कि विलय होगा.

उन्होंने कहा कि शरद पवार ने भले ही कांग्रेस छोड़ दी हो, लेकिन उन्होंने कभी इसकी विचारधारा नहीं छोड़ी. क्या वह ऐसी भाजपा के साथ गठबंधन करेंगे, जो देश के संविधान को भी नहीं मानती. ऐसी पार्टी जिसने अंग्रेजों का साथ दिया था. मुझे नहीं लगता कि शरद पवार ऐसे संगठन में शामिल होंगे.

डीकेएम/एबीएम