छह महीने बाद कम हो रहा फाइजर वैक्सीन का असर -ताजा अध्ययन में हुआ है यह खुलासा

कैलिफोर्निया . एक ताजा अघ्ययन में पता चला है ‎कि कोरोना (Corona virus) को लेकर फाइजर की वैक्सीन का असर 6 महीनों बाद बड़े स्तर पर कम हो रहा है. हालांकि, अस्पताल में भर्ती होने और मौत के मामले में कम से कम 6 महीनों तक वैक्सीन की प्रभावकारिता 90 फीसदी पर बनी हुई है. अमेरिका में बुजुर्गों और कुछ नागरिकों को फाइजर का बूस्टर डोज दिया जा रहा है.

जानकारी के अनुसार, कोरोना (Corona virus) संक्रमण से बचाने में फाइजर की वैक्सीन का प्रभाव दूसरे डोज के 6 महीनों बाद 88 फीसदी से 47 फीसदी पर आ गया है. हालांकि अच्छी खबर यह है कि डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ भी वैक्सीन अस्पताल में भर्ती होने और मौत के मामले में बेहतर सुरक्षा दे रही है. फाइजर वैक्सीन्स में चीफ मेडिकल ऑफिसर और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट लुई जोडार ने कहा, ‘हमारा वेरिएंट स्पेसिफिक एनालिसिस बताता है कि (फाइजर/बायोएनटेक) वैक्सीन सभी वेरिएंट्स ऑफ कंसर्न के खिलाफ प्रभावी है.’डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ टीके की प्रभावकारिता एक महीने के बाद 93 फीसदी थी, जो चार महीनों के बाद घटकर 53 प्रतिशत हो गई. कोरोना (Corona virus) के अन्य वेरिएंट्स के मामले में प्रभाव 97 फीसदी से कम हो कर 67 प्रतिशत पर आ गया था. स्टडी की प्रमुख सारा टारटोफ ने बताया, ‘हमारे लिए वह दिखाता है कि डेल्टा बचकर भागने वाला वेरिएंट नहीं है, जो वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा को पूरी तरह चकमा दे रहा है.’अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने बुजुर्गों को कोरोना संक्रमण के सबसे ज्यादा जोखिम का सामना कर रहे लोगों को फाइजर का बूस्टर डोज लगाए जाने की अनुमति दे दी है.

वैज्ञानिकों का मानना है कि सभी के लिए बूस्टर डोज की सिफारिश करने के लिए और भी ज्यादा डेटा की जरूरत है.शोधकर्ताओं के मुताबिक डेटा दिखाता है कि आंकड़ों में गिरावट का कारण ज्यादा संक्रामक वेरिएंट्स के बजाए कम होती प्रभावकारिता है.फाइजर और कैसर पर्मानेंट ने दिसंबर 2020 से लेकर अगस्त 2021 के बीच कैसर पर्मानेंट सदर्न कैलिफोर्निया के करीब 34 लाख लोगों के हेल्थ रिकॉर्ड्स की जांच की.

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