
Lucknow, 15 अगस्त . उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (यूपी एसटीएफ) के इंस्पेक्टर सुनील कुमार को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किए जाने पर शिया मरकजी चांद कमिटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने शहीद Policeकर्मियों और सैनिकों के सम्मान को जरूरी बताते हुए कहा कि देश और प्रदेश की सेवा करते हुए अपनी जान गंवाने वालों का बलिदान किसी भी व्यक्तिगत नुकसान तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह राष्ट्र और समाज के लिए दी गई बड़ी कुर्बानी है.
मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि चाहे सेना का कोई अधिकारी या जवान हो अथवा Police का कोई अधिकारी या सिपाही, जब वह अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए शहीद होता है तो उसकी शहादत व्यक्तिगत मामला नहीं रह जाती. ये जवान देश और प्रदेश की सुरक्षा के लिए उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी निभाते हुए अपनी जान कुर्बान करते हैं. ऐसे शहीदों को जितना भी सम्मान दिया जाए, वह कम है.
उन्होंने कहा कि किसी परिवार के मुखिया, बेटे या पिता के चले जाने से परिवार को जो नुकसान होता है, उसकी भरपाई पैसे या किसी पुरस्कार से नहीं की जा सकती. Government की ओर से आर्थिक सहायता और सम्मान दिए जाने के बावजूद अपने प्रियजन को खोने का दुख अपनी जगह बना रहता है. उन्होंने कहा कि शहीद के परिवार को मिलने वाला सम्मान और पुरस्कार परिवार के मनोबल को बढ़ाने का काम करता है. इससे परिवार को यह एहसास होता है कि Government और देश ने उनके प्रियजन की कुर्बानी को याद रखा है और उनके बलिदान को सम्मान दिया है.
उन्होंने कहा कि कीर्ति चक्र जैसे सम्मान से शहीद के परिवार को हौसला मिलता है. परिवार के लिए यह संदेश महत्वपूर्ण होता है कि उनके सदस्य ने देश और समाज के लिए जो बलिदान दिया, उसे राष्ट्र ने सम्मान के साथ स्वीकार किया है.
मौलाना सैफ अब्बास ने उत्तर प्रदेश Government से भी शहीद Policeकर्मियों और अन्य सुरक्षाकर्मियों के लिए एक विशेष सम्मान व्यवस्था शुरू करने की मांग की. उन्होंने सुझाव दिया कि यदि वर्ष के दौरान उत्तर प्रदेश में कोई Policeकर्मी या अन्य सुरक्षाकर्मी ड्यूटी निभाते हुए शहीद होता है तो राज्य Government की ओर से भी उसके नाम पर कोई विशेष पदक या सम्मान प्रदान किया जाना चाहिए. इस तरह की पहल से शहीद परिवारों को सम्मान और प्रोत्साहन मिलेगा. साथ ही ड्यूटी पर तैनात दूसरे Policeकर्मियों और जवानों का भी मनोबल बढ़ेगा.
मौलाना सैफ अब्बास ने आगे कहा कि शहीद परिवार अपने प्रियजन को खोने के बाद स्वाभाविक रूप से दुखी और उदास रहते हैं. ऐसे समय में Government और समाज की ओर से दिया गया सम्मान उनके लिए भावनात्मक सहारा बन सकता है. उन्होंने कहा कि जब किसी शहीद को पदक, मेडल या सम्मान मिलता है, तो परिवार के भीतर यह भावना मजबूत होती है कि उनके प्रियजन की कुर्बानी को भुलाया नहीं गया है. इससे परिवार में एक तरह का जोश और हौसला पैदा होता है.
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