थैलेसीमिया, ड्यूशनिन, मस्‍कुलर डिस्‍ट्रॉफी, हीमोफिलिया का नया आनुवांशिक कर सकते हैं इलाज


नई दिल्ली (New Delhi) . मांसपेशियों की गंभीर कमजोरी की बीमारी ड्यूशनिन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक ऐसी बीमारी है, जो सामान्‍य रूप से कम आयु में प्रारंभ होती है और बहुत तेजी से गंभीर रूप ले लेती है. आनुवांशिक नियंत्रण के माध्‍यम से इस बीमारी के इलाज की रणनीति शीघ्र बन सकती है. इस बीमारी का कोई ज्ञात इलाज नहीं है. सामान्‍यत: जीवन की गुणवत्‍ता में सुधार करके इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जाता है.

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के इस वर्ष के स्‍वर्ण जयंती फेलोशिप प्राप्‍त करने वाले 21 लोगों में एक भारतीय विज्ञान संस्‍थान, बेंगलुरू (Bengaluru) के सहायक प्राध्‍यापक संदीप ईश्‍वरप्‍पा ने बीमारी के प्रार‍म्भिक कारणों को नियंत्रित करने का प्रस्‍ताव रखा है. प्रारम्भिक कारणों में वंशानुगत प्रक्रिया है जो इस बीमारी को जन्‍म देती है. प्रोफेसर ईश्‍वरप्‍पा आनुवांशिक नियामक सिद्धान्‍तों के माध्‍यम से इस बीमारी के प्रारम्भिक कारणों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं. आनुवांशिक नियंत्रण सिद्धांत मानव शरीर, यीस्‍ट, बैक्‍टीरिया तथा ड्रोसोफिला में पाये जाते है.

प्रोफेसर संदीप ईश्‍वरप्‍पा का समूह रणनीति विकसित कर रहा है. समूह डीएनए में परिवर्तन से होने वाली विभिन्‍न आनुवांशिक बीमारियों पर नियंत्रण की रणनीति बना रहा है. यह समूह थैलेसीमिया के मामले में विट्रो में इसे प्राप्‍त करने में सफल हुआ है और अन्‍य बीमारियों के मॉडल पर काम कर रहा है. यह शोध कार्य शोध पत्रिका बायोकेमिस्‍ट्री में अभी हाल में ही प्रकाशित हुआ है. स्‍वर्ण जयंती फेलोशिप के साथ प्रोफेसर संदीप का समूह इस रणनीति का विस्‍तार ड्यूशनिन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी तक करेगा, यदि यह प्रयास सफल होता है तो यह परियोजना थैले‍सीमिया ड्यूशनिन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफिलिया जैसी आनुवांशिक बीमारियों के इलाज के लिए नई चिकित्‍सा प्रणाली विकसित करेगी.

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