मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन में आ रही मुश्किल के पीछे तेलंगाना का मामला

हैदराबाद, 10 जून . Madhya Pradesh से राज्यसभा के लिए कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है. मामला हैदराबाद की एक अदालत में कथित तौर पर लंबित उस केस से जुड़ा है, जिसका जिक्र उनके हलफनामे में नहीं किया गया था.

पिछले साल तेलंगाना के लिए एआईसीसी इंचार्ज को राज्य कांग्रेस ऑफिस, गांधी भवन में भेजे गए कानूनी नोटिस से पता चलता है कि वह कांग्रेस के एक पूर्व नेता और ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (जीएचएमसी) के पूर्व कॉर्पोरेटर की तरफ से दायर एक प्राइवेट शिकायत में प्रतिवादी थीं.

यह शिकायत 2025 में हैदराबाद में चौथे एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में बीएनएसएस की धारा 223 के तहत दायर की गई थी. चौथे प्रतिवादी के तौर पर लिस्टेड मीनाक्षी नटराजन को 17 सितंबर 2025 को अदालत में पेश होने और अगर कोई जवाब हो तो उसे दाखिल करने का निर्देश दिया गया था.

श्रीलता 2002 से 2007 तक टीडीपी के टिकट पर चुनी गई कॉर्पोरेटर थीं. उन्होंने कांग्रेस नेता शिव कुमार रेड्डी के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें शिव कुमार रेड्डी और उनके समर्थकों से जान का खतरा है.

शिकायतकर्ता ने मीनाक्षी नटराजन समेत सात कांग्रेस नेताओं को प्रतिवादी बनाया था. उनका तर्क था कि इन नेताओं को ‘परेशानी’ और ‘धमकियों’ के बारे में पता था, लेकिन उन्होंने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की.

शिकायत पर अदालत के निर्देश के बाद 28 मई, 2025 को First Information Report दर्ज की गई.

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि 2022 में श्रीलता की तरफ से दर्ज कराई गई पहली Police शिकायत में नटराजन का नाम नहीं था. सबूतों की कमी के कारण उस मामले को बंद कर दिया गया था. बाद में हैदराबाद और Bengaluru में उनकी प्राइवेट शिकायतों को भी बंद कर दिया गया था.

Madhya Pradesh में रिटर्निंग ऑफिसर, जिन्होंने नटराजन का नॉमिनेशन रद्द किया था. उन्होंने कथित तौर पर वरिष्ठ भाजपा नेता और मोहन यादव Government में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की शिकायत पर कार्रवाई की थी. शिकायत में कहा गया था कि नटराजन से जुड़ा एक मामला तेलंगाना की अदालत में लंबित है और उन्होंने अपने नॉमिनेशन में इसका खुलासा नहीं किया था.

कैलाश विजयवर्गीय की इस टिप्पणी ने विवाद खड़ा कर दिया कि उन्हें तेलंगाना के एक कांग्रेस नेता से ‘कागज’ मिला था.

बीआरएस नेता कृष्णंक मन्ने ने पूछा कि Madhya Pradesh भाजपा को किसने जानकारी दी? क्या इसमें तेलंगाना के गृह मंत्री की कोई भूमिका है?

बीआरएस नेता का दावा है कि नटराजन ने मूसी नदी के सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट, खम्मम में घरों को गिराने और हैदराबाद यूनिवर्सिटी में पेड़ों की कटाई का विरोध किया था.

डीकेएम/एबीएम