2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य, फॉर्च्यून 500 में भारत की 50 कंपनियां हों: पीएम मोदी

New Delhi, 15 अगस्त . Prime Minister Narendra Modi ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए वर्ष 2047 के लिए India के आर्थिक और औद्योगिक विकास का महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया. Prime Minister ने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को ऊर्जा, विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, फार्मा और वैश्विक कारोबार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचना होगा.

Prime Minister ने कहा कि वर्ष 2047 तक India को 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करनी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने अगले छह से सात वर्षों में पांच नए परमाणु रिएक्टरों को चालू करने का लक्ष्य भी रखा. उन्होंने बताया कि India ने इस वर्ष फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में महारत हासिल की है, जो देश को परमाणु ईंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.

Prime Minister मोदी ने कहा कि India की आर्थिक प्रगति केवल जीडीपी वृद्धि तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि भारतीय कंपनियों की वैश्विक उपस्थिति भी मजबूत होनी चाहिए. उन्होंने लक्ष्य रखा कि आने वाले वर्षों में फॉर्च्यून 500 सूची में 50 भारतीय कंपनियां शामिल हों. इसके अलावा, India का कम से कम एक बैंक दुनिया के शीर्ष पांच बैंकों में अपनी जगह बनाए.

उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना समय की आवश्यकता है और इसके लिए देश को उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पूरी वैल्यू चेन को विकसित करना होगा.

Prime Minister ने कहा कि India इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले एक से दो वर्षों में 7 से 8 नए सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित होंगे. उनका कहना था कि India को केवल असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि डिजाइन से लेकर विनिर्माण तक संपूर्ण आपूर्ति शृंखला में अपनी मजबूत भूमिका बनानी होगी.

उन्होंने कहा, “India को केवल कंपोनेंट नहीं, बल्कि जटिल और उन्नत उत्पादों का निर्माण भी करना होगा. डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक India को वैश्विक सप्लाई चेन का भरोसेमंद केंद्र बनना है.”

Prime Minister ने ऊर्जा क्षेत्र में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से पहले देश के केवल 70 शहरों में पाइप्ड गैस सुविधा उपलब्ध थी, जो अब बढ़कर 700 शहरों तक पहुंच गई है. वहीं, पाइप्ड गैस से जुड़े घरों की संख्या 20-22 लाख से बढ़कर लगभग 1.75 करोड़ हो चुकी है.

सौर ऊर्जा क्षेत्र में भी India ने बड़ी छलांग लगाई है. Prime Minister के अनुसार, वर्ष 2014 में देश की सौर ऊर्जा क्षमता केवल 2 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर 160 गीगावाट हो गई है. उन्होंने कहा कि ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के तहत अब तक 50 लाख से अधिक परिवार सौर ऊर्जा अपना चुके हैं और इस योजना का विस्तार तेजी से जारी है.

अपने संबोधन में Prime Minister ने ‘सप्त धारा’ का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि ये सात प्रमुख ताकतें India को अगले विकास चरण तक पहुंचाने और ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए आवश्यक गति और क्षमता प्रदान करेंगी. हालांकि उन्होंने इस अवधारणा को देश की दीर्घकालिक विकास रणनीति से जोड़ते हुए इसे भविष्य की प्रगति का आधार बताया.

इसके साथ ही, Prime Minister मोदी ने फार्मा क्षेत्र को लेकर भी बड़ा लक्ष्य तय किया. उन्होंने कहा कि भारतीय दवा कंपनियों को दुनिया की शीर्ष पांच फार्मा कंपनियों में स्थान बनाने का प्रयास करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि India अब केवल “दुनिया की फार्मेसी” नहीं रह गया है, बल्कि नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है. अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स और अत्याधुनिक उपचार तकनीकों पर Government विशेष जोर दे रही है.

Prime Minister ने कहा कि आत्मनिर्भरता, आयात पर निर्भरता में कमी और सरकारी समर्थन के कारण India वैश्विक मेड-टेक क्षेत्र में भी मजबूत स्थिति बना रहा है. पीएलआई योजना के तहत देश में 50 से अधिक उच्च तकनीक वाले मेडिकल उपकरणों का निर्माण शुरू हो चुका है.

उन्होंने कहा कि India का मेडिकल टेक्नोलॉजी बाजार वर्तमान में 15 से 16 अरब डॉलर का है और यह लगभग 12 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है. यह एशिया का चौथा सबसे बड़ा मेडिकल टेक्नोलॉजी बाजार है और दुनिया के शीर्ष 20 बाजारों में शामिल है. हालिया आकलनों के अनुसार, India का मेडिकल डिवाइस उद्योग 2047 तक 250 अरब डॉलर के बाजार के रूप में उभर सकता है.

Prime Minister ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि विकसित India का सपना तभी साकार होगा, जब देश ऊर्जा, तकनीक, विनिर्माण, स्वास्थ्य और वैश्विक व्यापार के हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुए और भारतीय कंपनियां विश्व मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाएं.

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