
कोलकाता, 30 जून . ताराताला में बन रहे गोदाम की छत गिरने से 16 लोगों की मौत के मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने कोलकाता नगर निगम (केएमसी) और कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट (केओपीटी) अधिकारियों से और जानकारी मांगी है.
यह वेयरहाउस प्रोजेक्ट केओपीटी की जमीन पर चल रहा था, जिसे वेयरहाउस के मालिक शंभूनाथ बेहरा ने लीज पर लिया था. वहीं, इस निर्माण कार्य की योजना को केएमसी के अधिकारियों ने मंजूरी दी थी.
शहर के एक Police अधिकारी ने कहा, “हमने केएमसी से उस जमीन के बारे में जमा की गई योजनाओं और दस्तावेजों की जानकारी मांगी है, जिस पर निर्माण कार्य चल रहा था. केओपीटी से भी पूछा गया है कि मिट्टी की जांच की गई थी या नहीं.”
इस मामले में वेयरहाउस के मालिक शंभूनाथ बेहरा और कोलकाता नगर निगम के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के पूर्व ओएसडी कालीचरण बनर्जी को पहले ही गिरफ़्तार किया जा चुका है.
शहर की Police से जुड़े सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए दोनों व्यक्ति पूछताछ के दौरान अधिक कुछ नहीं बोल रहे हैं. ऐसे में एसआईटी के सदस्य बेहरा ब्रदर्स से बरामद दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं. जांचकर्ता यह पता लगाने की भी कोशिश कर रहे हैं कि क्या जमीन की लीज में दलाली का कोई मामला शामिल था. वे यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या काम पूरा करने के लिए कोई समय-सीमा तय की गई थी.
इससे पहले, भारतीय जनता पार्टी के मजदूर सेल ने तारातला Police स्टेशन में फिरहाद हकीम और तृणमूल कांग्रेस के दो पार्षद अनवर खान और शम्स इक़बाल के खिलाफ इस हादसे के मामले में Police शिकायत दर्ज कराई थी.
कोलकाता Police की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की शुरुआती जांच से पता चला है कि दो घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल और कास्टिंग का गलत तरीके के कारण यह हादसा हुआ, जिसमें अब तक 16 लोगों की जान जा चुकी है.
Chief Minister सुवेंदु अधिकारी ने पहले ही यह पक्का करने का वादा किया है कि इस मामले को तार्किक अंजाम तक पहुंचाया जाएगा और इस घटना के लिए जिम्मेदार कोई भी व्यक्ति सजा से नहीं बचेगा.
उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस Government पर रिश्वत के बदले गैर-कानूनी निर्माण की इजाजत देकर “सिटी ऑफ जॉय” (खुशियों का शहर) को “सिटी ऑफ डेथ्स” (मौतों का शहर) में बदलने का आरोप भी लगाया है.
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ओपी/पीएम
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