
चेन्नई, 28 जुलाई . मेकेदातु बांध को लेकर तमिलनाडु के Chief Minister विजय ने Tuesday को Prime Minister Narendra Modi को पत्र लिखा है. Chief Minister विजय ने पत्र में लिखा कि मैं आपका ध्यान राज्यसभा में मेकेदातु बांध के संबंध में जलशक्ति राज्यमंत्री की ओर से दिए गए उत्तर की ओर आकर्षित करना चाहता हूं, जहां मंत्री ने कहा है कि 16 फरवरी 2018 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में स्पष्ट रूप से यह निर्धारित नहीं किया गया है कि कर्नाटक को कावेरी नदी पर एक संरचना का निर्माण करने से पहले निचले तटवर्ती राज्यों की सहमति लेनी चाहिए.
उन्होंने पत्र में लिखा, “जलशक्ति राज्यमंत्री का यह निराशाजनक उत्तर निचले तटवर्ती राज्यों की सहमति के संबंध में मौजूदा कानूनी स्थिति और स्थापित कानून पर विचार किए बिना दिया गया प्रतीत होता है.” Chief Minister विजय ने पत्र में लिखा, “मैं आपके ध्यान में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच अलमट्टी मामले में Supreme Court की संविधान बेंच का फैसला लाना चाहता हूं, जिसमें यह फैसला सुनाया गया था कि निचले नदी किनारे के राज्य की सहमति बहुत जरूरी है.”
पत्र में उन्होंने लिखा, “कर्नाटक राज्य बनाम आंध्र प्रदेश राज्य [2000(9)] एससीसी पेज 572 के पैराग्राफ 100 के अनुसार, “न ही कर्नाटक राज्य को बाकी सभी नदी किनारे के राज्यों की सहमति के बिना और केंद्र Government की मंजूरी के बिना उस ऊंचाई तक कंस्ट्रक्शन करने की इजाजत दी जा सकती है, जहां तक कावेरी ट्रिब्यूनल अवॉर्ड का सवाल है, Supreme Court ने ट्रिब्यूनल अवॉर्ड के क्लॉज 18 को साफ तौर पर कन्फर्म किया है, जो हर राज्य को अपने इलाके में पानी को सिर्फ “ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ न होने वाले तरीके से” रेगुलेट करने की शक्ति देता है. इस तरह, कोई भी प्रोजेक्ट जिसमें अवॉर्ड के तहत बनाए गए रेगुलेटेड फ्लो 2 सिस्टम को प्रभावित करने की क्षमता हो, उसे अवॉर्ड के साथ कंसिस्टेंसी के लिए जरूरी तौर पर स्क्रूटनी की जरूरत होती है.”
उन्होंने पत्र में लिखा, “पानी छोड़ने के क्वांटिटी और रेगुलेटेड पैटर्न, दोनों के संबंध में निचले नदी किनारे के राज्यों के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं. प्रोजेक्ट पर आगे कोई भी विचार सभी निचले नदी किनारे के राज्यों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, पूरी टेक्निकल और कानूनी जांच के बाद ही किया जाएगा. कावेरी नदी सिर्फ पानी का सोर्स नहीं है बल्कि पूरे दक्षिणी India के लाखों किसानों और नागरिकों की जीवनरेखा है.”
पत्र में लिखा, “ट्रिब्यूनल अवॉर्ड और Supreme Court के फैसले की ईमानदारी की रक्षा करना, इसे चलाने वाले संवैधानिक सिस्टम में भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी है. मैं न्याय, संघीय सद्भाव और न्यायिक फैसलों को ईमानदारी से लागू करने के बड़े हित में आपसे दखल देने का अनुरोध करता हूं.
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एसडी/पीएम
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