
Bengaluru, 30 मई . कर्नाटक के निवर्तमान Chief Minister सिद्धारमैया ने Saturday को Chief Minister पद के लिए नामित डीके शिवकुमार को कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता के रूप में सर्वसम्मति से चुने जाने पर बधाई दी और चुनौतीपूर्ण समय में राज्य और पार्टी दोनों का नेतृत्व करने की उनकी क्षमता पर विश्वास व्यक्त किया.
शिवकुमार को संबोधित संदेश में सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने अपने सहयोगी की ‘अदम्य ऊर्जा, संगठनात्मक कौशल और कांग्रेस पार्टी के प्रति अटूट निष्ठा’ को करीब से देखा है और आशा व्यक्त की है कि इन गुणों का उपयोग कर्नाटक की जनता के कल्याण के लिए किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि कर्नाटक न केवल प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश का अग्रणी राज्य है, बल्कि धन, शक्ति और अवसरों के समान वितरण के लिए एक आदर्श के रूप में भी उभरा है. सिद्धारमैया ने आगे कहा कि राज्य में शुरू की गई प्रत्येक योजना को अन्य राज्य अपना रहे हैं और लागू कर रहे हैं, जो गर्व की बात है.
अपने कार्यकाल पर विचार करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि उन्हें आठ वर्षों तक कन्नड़ भाषी लोगों के Chief Minister के रूप में सेवा करने और कर्नाटक को एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और आत्मसम्मानित राज्य बनाने में योगदान देने पर गर्व है.
उन्होंने शिवकुमार से कहा कि इस विकास यात्रा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब आपके कंधों पर है. मुझे विश्वास है कि इस कार्य को पूरा करने के लिए आपमें आवश्यक प्रतिबद्धता, क्षमता और दूरदर्शिता है.
सिद्धारमैया ने कहा कि देश भर के लोग आर्थिक असुरक्षा और भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, और कहा कि अब शिवकुमार की जिम्मेदारी है कि वे प्रभावी शासन के माध्यम से लोगों में विश्वास जगाएं और राज्य को विकास के पथ पर अग्रसर रखें.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कर्नाटक के विकास के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी की पुरानी शान को बहाल करना सभी पार्टी सदस्यों की जिम्मेदारी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि शिवकुमार का नेतृत्व चुनौतियों से पार पाने और पार्टी की स्थिति को मजबूत करने में मददगार साबित होगा.
सिद्धारमैया ने देश को जाति और धर्म के आधार पर बांटने के प्रयासों, संविधान पर सवाल उठाने और असहमति को दबाने पर भी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं के बलिदानों से निर्मित India को जाति और धर्म के नाम पर खंडित किया जा रहा है, जबकि स्वयं संविधान पर सवाल उठाए जा रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि सत्ता को चुनौती देने वालों को दबाया जा रहा है और महात्मा गांधी की हत्या करने वाले अब गोडसे का महिमामंडन कर रहे हैं.
एक नए वैचारिक संघर्ष का आह्वान करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि समानता, सद्भाव, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता जैसे संवैधानिक मूल्यों पर स्थापित कांग्रेस को जमीनी स्तर से मजबूत किया जाना चाहिए.
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एमएस/
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