चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग को ताइवान का करारा जवाब

नई दिल्ली (New Delhi) . ताइवान को चीन में मिलाने की कसम खाने वाले ड्रैगन को करारा जवाब मिला है. चीनी राष्ट्रपति के बयान का मुंहतोड़ जवाब देते हुए ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने रविवार (Sunday) को कहा कि ताइवान बीजिंग के किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा और अपने लोकतांत्रिक जीवन की रक्षा करेगा. बता दें कि ताइवान और चीन के पुन: एकीकरण की जोरदार वकालत करते हुए चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने शनिवार (Saturday) को कहा था कि ‘ताइवान प्रश्न’ का मुद्दा सुलझाया जाएगा और उसे फिर से चीन में मिलाया जाएगा. ताइवान के राष्ट्रीय दिवस के मौके पर राष्ट्रपति ने एक भाषण में कहा कि हम जितना अधिक हासिल करते हैं, चीन से उतना ही अधिक दबाव का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि कोई भी ताइवान को चीन के बनाए रास्‍ते पर चलने के लिए मजबूर नहीं कर सकता. उन्होंने ताइवान को “लोकतंत्र की रक्षा की पहली पंक्ति पर खड़ा” बताया. ताइवान की राष्ट्रपति का बयान ऐसे वक्त में आया है, जब चीन की ओर से लगातार हवाई घुसपैठ की हिमाकत हो रही है और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान के एकीकरण की वकालत की है.

उन्होंने कहा कि हम (बीजिंग के साथ) संबंधों को ठीक करने की उम्मीद करते हैं और हम कोई भी काम जल्दबाजी में नहीं करेंगे. मगर उन्होंने चीन को ललकारते हुए कहा कि इसमें कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि ताइवान के लोग दबाव के आगे झुकेंगे. दरअसल, स्व-शासित ताइवान के 23 मिलियन लोग चीन द्वारा आक्रमण के निरंतर खतरे में रहते हैं. चीन ताइवान को अपने क्षेत्र के रूप में देखता है और उसने कमस खाई है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह एक दिन इसे बलपूर्वक अपने में मिला लेगा. ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ताइवान की स्वतंत्रता की समर्थक हैं. ताइवान और चीन 1949 में गृह युद्ध के बीच उस समय अलग हो गए थे जब माओ जेदोंग के नेतृत्व में देश के मुख्य हिस्से पर साम्यवादियों (कम्युनिस्ट) की सत्ता में आने के बाद सत्तारूढ़ नेशनलिस्ट पार्टी के लोग भागकर इस द्वीप पर चले गए थे. इसके बाद से ताइवान में स्वशासन है और चीन ने इसे वैधता प्रदान करने से इनकार कर दिया.

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