स्वीडन: घटते जन्मदर ने बढ़ाई चिंता, पीएम ने चुनावों में आईवीएफ को मुख्य मुद्दा बनाने का किया वादा

स्टॉकहोम, 25 मई . खुशहाल देशों की लिस्ट में चौथे नंबर पर काबिज स्वीडन गिरते जन्मदर से परेशान है. यही वजह है कि देश के Prime Minister उल्फ क्रिस्टर्सन ने आगामी चुनावों का अहम मुद्दा आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) को बनाने का वादा किया है.

स्वीडिश Government ने हाल ही में पहली बार माता-पिता बनने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए राज्य द्वारा वित्तपोषित आईवीएफ प्रयासों की संख्या तीन से बढ़ाकर छह कर दी.

अब क्रिस्टर्सन ने कहा है कि यदि उनका दल मॉडरेट पार्टी सितंबर में होने वाले आम चुनाव में सत्ता में बनी रहती है, तो Government दूसरे या अतिरिक्त बच्चों के लिए भी आईवीएफ का खर्च वहन करेगी. उनकी अल्पमत गठबंधन Government को दक्षिणपंथी स्वीडन डेमोक्रेट्स का समर्थन प्राप्त है.

यह ऐलान ऐसे समय में किया गया जब आधिकारिक आंकड़ों ने तस्वीर स्पष्ट की. बताया कि स्वीडन की प्रजनन दर पिछले वर्ष घटकर 1.42 रह गई, जो 1749 से रिकॉर्ड शुरू होने के बाद सबसे कम है.

ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने क्रिस्टर्सन के हालिया पॉडकास्ट के हवाले से इसकी जानकारी दी. स्वीडिश पीएम ने साक्षात्कार के दौरान कहा, “यह ऐसा स्तर है जो हमने स्वीडन में पहले कभी नहीं देखा. इससे मुझे सोचने पर मजबूर होना पड़ा. हो सकता है कि बहुत से लोग बच्चे नहीं चाहते हों, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि काफी लोग ऐसे भी हैं जो वास्तव में बच्चे चाहते हैं लेकिन उन्हें हासिल नहीं कर पा रहे हैं.”

नए कानून के तहत पहली संतान के लिए छह बार मुफ्त आईवीएफ की सुविधा मिलेगी, लेकिन अतिरिक्त बच्चों के लिए यह सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है. एक बार के आईवीएफ प्रयास की लागत लगभग 50,000 स्वीडिश क्रोनर (करीब 3,975 पाउंड) है.

अतिरिक्त बच्चों के लिए भी आईवीएफ सहायता देने के चुनावी वादे पर उन्होंने कहा, “एक बच्चा होना गलत नहीं है, लेकिन बहुत से लोग जो एक बच्चा रखते हैं, वे चाहते हैं कि उसका एक भाई या बहन भी हो.”

उन्होंने यह भी कहा कि वह “यह तय करने में बिल्कुल दखल नहीं देना चाहते कि हर परिवार में कितने बच्चे होने चाहिए,” क्योंकि यह “बहुत निजी मामला” है.

पड़ोसी देश नॉर्वे की तरह, Government ने जन्मदर में गिरावट को पलटने के तरीकों पर एक अध्ययन शुरू कराया है. Government ने चेतावनी दी है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो हर नई पीढ़ी अपने माता-पिता की पीढ़ी से लगभग एक-तिहाई छोटी हो जाएगी.

केआर/