
न्यूयॉर्क, 30 जून . अमेरिकी Supreme Court फैसले से इमिग्रेशन से जुड़ी मुश्किलों में फंसे एच-1बी वर्क वीजा पर रह रहे करीब तीन लाख भारतीयों को बड़ी राहत मिली है. कोर्ट के फैसले में अमेरिका में जन्म लेने वाले सभी बच्चों की नागरिकता के अधिकार को बरकरार रखा गया है.
यह फैसला President डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. ट्रंप चाहते थे कि अस्थायी वीजी पर कानूनी रूप से अमेरिका में रह रहे लोगों के यहां जन्म लेने वाले बच्चों को अमेरिकी नागरिकता न मिले.
Supreme Court के फैसले से एच-1बी वीजा पर रहने वाले भारतीयों को राहत मिली है. इनमें से कई लोगों को खुद अमेरिकी नागरिक बनने के लिए कई दशक तक इंतजार करना पड़ सकता है. इसी तरह छात्र वीजा, विजिटर वीजा और दूसरे अस्थायी वीजा पर रहने वाले लोगों के बच्चों को भी अब जन्म लेते ही अमेरिकी नागरिकता मिलेगी और उन्हें जीवनभर अमेरिका में रहने का अधिकार रहेगा.
इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट नाम की संस्था के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने कहा, “आज का फैसला इस बात की मजबूत पुष्टि करता है कि अमेरिका में किसे अपना माना जाता है. ट्रंप के इस आदेश से भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रवासी परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले थे.”
उन्होंने भारतीयों के ग्रीन कार्ड की लंबी प्रतीक्षा सूची का जिक्र करते हुए कहा कि एच-1बी वीजा पर रहने वाले कई भारतीयों के बच्चे अमेरिका में जन्म लेते हैं, लेकिन उनके माता-पिता को स्थायी निवासी बनने का रास्ता साफ होने में कई साल लग जाते हैं.
पटेल ने लिखा, “आज Supreme Court ने उन परिवारों को देखा और कहा: ‘आपके बच्चे अमेरिकी हैं. वे यहीं के हैं.”
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत वाले फैसले में लिखा, “हम संविधान के 14वें संशोधन में किए गए उस वादे को निभाते हैं, जिसमें अमेरिका में जन्म लेने वाले सभी लोगों को नागरिकता देने की बात कही गई है.”
उन्होंने कहा, “तब भी और आज भी, नागरिकता का मतलब अपने अधिकारों के साथ इस देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूरी तरह भाग लेने का अधिकार है.”
भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने भी इस फैसले का स्वागत किया. उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “मैं खुद एक प्रवासी हूं. मैं जानती हूं कि जब इस देश के वादे निभाए जाते हैं तो उनका क्या मतलब होता है, और जब उन्हें तोड़ा जाता है तो उसकी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है.”
उन्होंने कहा, “हमारे संविधान में कोई अपवाद नहीं है. इसमें यह नहीं लिखा कि किसे इस देश का हिस्सा बनने का अधिकार है और किसे नहीं. जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता इस देश का कानून है, और आज Supreme Court ने इसे फिर से साफ कर दिया है.”
President बनने के बाद अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी किया था. इसमें कहा गया था कि अस्थायी वीजा पर रहने वाले लोगों या अवैध प्रवासियों के यहां अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता नहीं दी जाएगी. यह कदम पिछले सौ साल से भी ज्यादा समय से लागू जन्म के आधार पर नागरिकता देने की व्यवस्था को बदलने की कोशिश थी.
Supreme Court के फैसले पर नाराजगी जताते हुए ट्रंप ने इसे ‘देश के लिए बुरी खबर’ बताया. उन्होंने कहा कि अब अमेरिकी कांग्रेस को कानून बनाकर इसे बदलना चाहिए.
उन्होंने अपने social media प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “हम कांग्रेस में कानून बनाकर इसे आसानी से बदल सकते हैं. इसके लिए संविधान में लंबा और मुश्किल संशोधन करने की जरूरत नहीं है.”
हालांकि, यह साफ नहीं है कि अगर कांग्रेस ऐसा कोई कानून बनाती भी है, तो Supreme Court के इस स्पष्ट फैसले के बाद वह अदालत में टिक पाएगा या नहीं.
ट्रंप का कहना था कि उनका कदम मुख्य रूप से तथाकथित ‘बर्थ टूरिज़्म’ को रोकने के लिए था. इसमें कुछ लोग टूरिस्ट वीजा पर अमेरिका आते हैं, यहां बच्चे को जन्म दिलाते हैं और फिर वापस अपने देश लौट जाते हैं, ताकि बच्चे की अमेरिकी नागरिकता के आधार पर भविष्य में पूरे परिवार को फायदा मिल सके.
ट्रंप ने यह नियम सिर्फ ऐसे मामलों तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने इसे एच-1बी वीजा और दूसरे वैध अस्थायी वीजा पर कानूनी रूप से रह रहे लोगों पर भी लागू करने की कोशिश की.
यह मामला अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की व्याख्या पर आधारित था. यह संशोधन 1866 में पारित हुआ और 1868 में लागू किया गया था. इसका मुख्य उद्देश्य गृहयुद्ध के बाद आजाद किए गए गुलामों और उनके बच्चों को पूरी अमेरिकी नागरिकता देना था.
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एवाई/डीकेपी
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