
Mumbai , 30 मई . शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली, मराठा आरक्षण आंदोलन, वाईएस शर्मिला की संभावित राज्यसभा उम्मीदवारी और डेयरी उत्पादों पर हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर चल रही बहस सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी.
नीट परीक्षा और एनटीए की कार्यप्रणाली पर Supreme Court की हालिया टिप्पणियों का स्वागत करते हुए आनंद दुबे ने कहा कि अदालत ने उचित सुझाव दिया है कि एनटीए को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) जैसी संस्थाओं से सीख लेनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि यूपीएससी देश की सबसे प्रतिष्ठित और विश्वसनीय परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था है, जो वर्षों से आईएएस, आईपीएस और अन्य अखिल भारतीय सेवाओं के लिए परीक्षाएं आयोजित कर रही है. यूपीएससी की परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाएं लगभग सुनने को नहीं मिलतीं, जबकि हाल के वर्षों में नीट और विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों और अभ्यर्थियों का भरोसा प्रभावित किया है.
दुबे ने आरोप लगाया कि एनटीए की ओर से कहीं न कहीं लापरवाही हुई है और Supreme Court की फटकार के बाद संस्था में आवश्यक सुधार देखने को मिल सकते हैं.
केरल में ‘वंदे मातरम’ को लेकर हुए विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए आनंद दुबे ने कहा कि राष्ट्रगीत का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए और जहां भी इसका गायन हो, उसे पूर्ण रूप से गाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि किसी को राष्ट्रगीत के शब्द या धुन की जानकारी नहीं है तो उसे सीखना चाहिए.
दुबे ने कहा कि कांग्रेस को भी इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उसके कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्वजों ने ‘वंदे मातरम’ का गायन किया था. राष्ट्रगीत देश की एकता, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है, इसलिए इसके प्रति सभी Political दलों और नागरिकों को सम्मान का भाव रखना चाहिए.
मराठा आरक्षण के मुद्दे पर आनंद दुबे ने आंदोलनकारी नेता और Maharashtra Government के बीच सार्थक संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि मनोज जरांगे पिछले कई वर्षों से मराठा समाज के आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और समय-समय पर Government के साथ बातचीत के बाद आंदोलन स्थगित भी करते रहे हैं.
उन्होंने कहा, मराठा समाज को आरक्षण के लाभ दिलाने की मांग को लेकर लगातार प्रयास हो रहे हैं, लेकिन Government और आंदोलनकारियों के बीच अभी तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है.
दुबे ने सुझाव दिया कि Chief Minister और मनोज जरांगे को एक साथ बैठकर बातचीत के जरिए ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे दोनों पक्षों की चिंताओं का समाधान हो सके और समाज में स्थिरता बनी रहे.
आंध्र प्रदेश कांग्रेस की नेता के राज्यसभा जाने की संभावनाओं पर भी आनंद दुबे ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि वाईएस शर्मिला का आंध्र प्रदेश की राजनीति में प्रभाव है और यदि वह राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के लिए सक्रिय भूमिका निभाना चाहती हैं तो यह पार्टी के लिए लाभदायक हो सकता है.
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यसभा उम्मीदवारों का चयन कांग्रेस का आंतरिक मामला है और अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व को लेना है. दुबे के अनुसार, कांग्रेस को इस बात पर विचार करना चाहिए कि वह इस Political परिस्थिति का अधिकतम लाभ किस प्रकार उठा सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति कई सीटों पर मजबूत दिखाई देती है.
डेयरी उत्पादों पर हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर चल रही बहस पर आनंद दुबे ने संतुलित दृष्टिकोण रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि कुछ देशों, विशेषकर खाड़ी और अन्य मुस्लिम बहुल देशों में हलाल प्रमाणन को मान्यता प्राप्त है और वहां निर्यात होने वाले उत्पादों के लिए ऐसे प्रमाणपत्र व्यावसायिक आवश्यकता हो सकते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि India में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर अलग राय रखते हैं और डेयरी उत्पादों पर इस प्रकार के प्रमाणन को लेकर उनकी भावनाएं प्रभावित होती हैं.
दुबे ने कहा कि यदि किसी कंपनी द्वारा विदेशी बाजारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रमाणन प्राप्त किया जाता है तो उसे स्पष्ट रूप से उपभोक्ताओं के सामने रखा जाना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस विषय पर सभी समुदायों की भावनाओं और विश्वासों का सम्मान किया जाना चाहिए तथा किसी भी विवाद का समाधान संवाद और पारदर्शिता के माध्यम से निकाला जाना चाहिए.
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एएसएच/
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