
New Delhi, 22 अगस्त . Supreme Court ने Jharkhand न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2023 (सिविल जज जूनियर डिवीजन भर्ती) से जुड़े 35 अभ्यर्थियों की याचिका Saturday को खारिज कर दी. ये वे अभ्यर्थी थे जिन्हें संशोधित मेरिट सूची जारी होने के बाद चयन सूची से बाहर कर दिया गया था.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि Jharkhand Government और Jharkhand लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) इस पूरी भर्ती परीक्षा को पहले ही रद्द कर चुके हैं. इस पर Supreme Court ने कहा कि जब परीक्षा ही निरस्त हो चुकी है, तब इस याचिका पर आगे सुनवाई का कोई औचित्य नहीं रह जाता. इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी.
Jharkhand लोक सेवा आयोग ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के 138 पदों पर भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा 10 मार्च 2024 को आयोजित की थी. परीक्षा के बाद आयोग ने तीन बार मॉडल उत्तर कुंजी जारी की और अंततः 2 जुलाई 2024 को परिणाम तथा कट-ऑफ अंक घोषित किए. इस परिणाम में 1,797 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था.
परीक्षा परिणाम के बाद मॉडल उत्तर कुंजी में कथित त्रुटियों, आरक्षण व्यवस्था और दिव्यांग कोटा को लेकर विवाद खड़ा हो गया. मामला पहले Jharkhand हाईकोर्ट पहुंचा और बाद में Supreme Court तक गया. हाईकोर्ट ने संशोधित परिणाम जारी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन आरोप लगा कि आयोग ने आदेश का पालन नहीं किया.
इसके बाद अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की, जिस पर अदालत ने जेपीएससी को कड़ी फटकार भी लगाई थी.
बता दें कि Jharkhand Government ने भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं और अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन के बाद कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया. इनमें Jharkhand न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा भी शामिल है. इसी कारण Supreme Court ने माना कि परीक्षा निरस्त होने के बाद 35 अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई का कोई व्यावहारिक आधार नहीं बचा है.
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डीएससी
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