
New Delhi, 13 जुलाई : Supreme Court ने Monday को कन्नूर डेंटल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. एम. कोदंडा राम को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया. उन पर दलित छात्र नितिन राज के साथ कथित रूप से मौखिक उत्पीड़न करने का आरोप है. नितिन राज ने अप्रैल में आत्महत्या कर ली थी. अदालत ने कहा कि “यह संदेश जाना चाहिए कि शिक्षक छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं कर सकते.”
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने डॉ. एम. कोदंडा राम द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज कर दी. यह याचिका केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई थी, जिसमें डेंटल छात्र की मौत के मामले में गिरफ्तारी से पहले संरक्षण (अग्रिम जमानत) देने से इनकार किया गया था.
सुनवाई के दौरान डॉ. राम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने दलील दी कि कक्षा में कथित अपमान की घटना छात्र की मौत से लगभग एक माह पहले हुई थी, इसलिए इसे आत्महत्या का निकटतम कारण नहीं माना जा सकता.
उन्होंने कहा कि छात्र की मौत से करीब एक घंटे पहले हुई घटना अधिक महत्वपूर्ण थी. उनके अनुसार, नितिन राज ने कथित तौर पर बिना अनुमति एक प्रोफेसर का नाम गारंटर के रूप में इस्तेमाल कर मोबाइल ऐप के जरिए ऋण लिया था. इसके बाद रिकवरी एजेंटों की शिकायत पर प्राचार्य के कक्ष में उसे फटकार लगाई गई थी.
नायडू ने यह भी तर्क दिया कि डॉ. राम के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी करने का कोई आरोप नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि छात्रों के प्रति सख्ती बरतने वाले शिक्षकों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी तो इसका शिक्षकों पर ‘चिलिंग इफेक्ट’ पड़ेगा और अनुशासन बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा.
उन्होंने कहा, “वह एक मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर हैं. छात्र के हित में कभी-कभी शिक्षक का व्यवहार सख्त या अधिक नियंत्रणकारी हो सकता है.”
प्रोफेसर के कथित व्यवहार पर सवाल उठाते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अगुवाई वाली पीठ ने कहा, “अमानवीय ही एकमात्र शब्द है जो मेरे मन में आता है. वह छात्रों से किस तरह बात करते हैं?”
पीठ ने आगे कहा कि किसी छात्र को सार्वजनिक रूप से अपमानित किए जाने के मनोवैज्ञानिक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अदालत ने कहा, “उन्हें अपने कृत्य के परिणामों का एहसास होना चाहिए. यदि किसी छात्र का कक्षा में इस तरह अपमान किया जाए तो उसका क्या असर होगा? यही वह निर्णायक क्षण (टिपिंग प्वाइंट) था.”
जब वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि आरोपी प्रोफेसर “सबक सीख चुके हैं”, तो पीठ ने जवाब दिया, “सबक सीखने का सवाल ही नहीं उठता. हम आपको वे पंक्तियां जोर से पढ़ने के लिए नहीं कहेंगे.”
सर्वोच्च न्यायालय ने आगे कहा, “ऐसे व्यवहार के बाद कोई शिक्षक यूं ही बचकर नहीं निकल सकता. यह संदेश जाना चाहिए.”
इसके बाद अदालत ने केरल हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर एसएलपी खारिज कर दी.
कन्नूर डेंटल कॉलेज के छात्र नितिन राज की 10 अप्रैल को कॉलेज के पास एक इमारत से कूदने के बाद कथित तौर पर आत्महत्या से मौत हो गई थी.
नितिन राज के पिता की शिकायत के आधार पर Police ने डॉ. राम और दो अन्य फैकल्टी सदस्यों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया. शिकायत में आरोप लगाया गया कि छात्र को उसकी मौत से पहले जातिगत उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था.
19 जून को डॉ. राम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए केरल हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष के उस दावे का उल्लेख किया था कि छात्रों के बयानों से प्रोफेसर के अनुचित व्यवहार की पुष्टि होती है. अभियोजन के अनुसार, डॉ. राम ने अन्य फैकल्टी सदस्यों को भी नितिन राज को प्रताड़ित करने के लिए उकसाया था.
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान केरल Government ने अग्रिम जमानत का विरोध किया था, जबकि बचाव पक्ष ने cctv फुटेज और छात्र के कथित ऋण वसूली से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि उसकी मौत के पीछे कथित उत्पीड़न के अलावा अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं.
न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन की एकलपीठ ने मेडिकल कॉलेजों में उत्पीड़न के बार-बार सामने आ रहे आरोपों पर चिंता जताई थी. अदालत ने कहा था कि Government को ऐसी शिकायतों की जांच और सुधारात्मक उपाय सुझाने के लिए एक समिति गठित करने पर विचार करना चाहिए. हालांकि, अंततः अदालत ने डॉ. राम को गिरफ्तारी से संरक्षण देने से इनकार कर दिया.
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पीएम
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